Image by zhi wei yu from Pixabay

जिसने कदम कदम पर मेरा साथ निभाया
जब जब नम हुई आंखें स्नेह के रुमाल से सुखाया।
जिसने गुणो का व्याख्यान करके अवगुणों को छुपाया
जब जब मैं मुरझाई प्यार से सींच महकाई बगिया।
जिसने मेरे आत्म सम्मान को मान देकर जीता मेरा हिया
जब जब मैं बिखरी अपनी बाहों में समेट लिया।
जिसने मेरे हुनर को सराहकर आत्मनिर्भर बनाया
जब जब मैं रोग ग्रस्त हुई वेद सा रख रखाव किया।
जब जब मैं झंझावतो से घिरी निभाई मेरी सारी जिम्मेदारियां
जब जब मैं गर्त में गिरी आत्मविश्वास का सहारा दिया।
जिसने पथरीले रास्तों को सुगम बनाया
जब जब मैं डगमगाई सही राह दिखाया।
जो है मेरे अतः करण समाया
मेरा शिव मेरा पिया।

.    .    .

Discus