छोटी उम्र में देश के लिए दी कुर्बानी
सिंध के सक्खर का था हेमू कालानी।
उन्नीस साल की आयु में
शहीद हुआ देश की लड़ाई में।
बाल्यकाल से विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करता
गली गली सभाएं लेकर तिरंगा लहराता
सिंध का शेर हर दिल में बसता।
स्वराज सेना के थे रीढ़ की हड्डी
बने अंग्रेजों के लिए गले की हड्डी।
सरकार द्वारा दिए गए प्रलोभन
पर राष्ट्र धर्म का किया निर्वहन
क्रांतिकारी गतिविधियों का किया प्रस्फुटन।
फांसी के फंदे पर अकेला खड़ा
साथियों के नाम को छुपाया
कहता दो ही साथी, रिंच और हथौड़ा।
सिंधी समाज का गौरव, अमर तेरा बलिदान
युवाओं के आदर्श ,तुम पर है अभिमान
डाक टिकट जारी कर सरकार ने दिया सम्मान।