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किताबों के किरदारों सा यहाँ कोई नूर नहीं होता,
हक़ीक़त की कहानी में हर कोई मशहूर नहीं होता।
यहाँ हर मोड़ पर एक नया इम्तिहान मिलता है,
बिना गिरे किसी को ऊँचा आसमान नहीं मिलता।
ये कहानी है उन रातों की जो जाग कर गुज़री हैं,
उन उम्मीदों की जो टूटीं, फिर आँखों में उभरी हैं।
न कोई जादुई चिराग है, न कोई फ़रिश्ता आता है,
इंसान अपनी मेहनत से ही अपना नसीब बनाता है।
छाले पाँवों के बताते हैं कि सफ़र कितना सच्चा था,
वो तजुर्बा कड़वा ही सही, मगर दिखावे से अच्छा था।
ज़िंदगी के हर ज़ख्म में एक गहरा सबक छुपा होता है,
वही असली नायक है, जो हर हार के बाद खड़ा होता है।
कच्चे मकानों की छत से भी सपने बड़े निकलते हैं,
धूप में जलकर ही यहाँ फ़ौलाद के सांचे ढलते हैं।
ये महज़ शब्द नहीं, ये लहू का उब़ाल है,
सच्ची कहानी वही है, जो संघर्षों की मिसाल है।