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हमने छुपाए बहुत से जज़्बात मुस्कान के पीछे,
वर्ना आईने से रोज़ सच छुपाना आसान नहीं होता।
हर सुबह वही चेहरा, वही अभ्यास की हँसी,
भीतर कहीं टूटी हुई आवाज़, बाहर खामोशी।
लोगों ने पूछा हाल तो कह दिया—“सब ठीक है”,
क्योंकि हर दर्द को नाम देना ज़रूरी नहीं होता।
हमने छुपाए बहुत से जज़्बात मुस्कान के पीछे,
वर्ना आईने से रोज़ सच छुपाना आसान नहीं होता।
कुछ सपने थे जो अधूरे ही सो गए आँखों में,
कुछ रिश्ते रह गए सवाल बनकर बातों में।
समझौते हमने ओढ़ लिए शाल की तरह,
हर सच कह देना ही समझदारी नहीं होता।
हमने छुपाए बहुत से जज़्बात मुस्कान के पीछे,
वर्ना आईने से रोज़ सच छुपाना आसान नहीं होता।
भीड़ में रहकर भी तन्हा होना सीखा हमने,
अपने ही जज़्बातों से समझौता किया हमने।
जो दिखता है वही सब कुछ नहीं होता साहब,
हर चमकती आँख में उजाला नहीं होता।
हमने छुपाए बहुत से जज़्बात मुस्कान के पीछे,
वर्ना आईने से रोज़ सच छुपाना आसान नहीं होता।
रातें जानती हैं वो बातें जो दिन ने न सुनीं,
तकिये ने सह लीं वो सिसकियाँ जो होंठों ने न कही।
वक़्त ने सिखा दिया चुप रहना भी एक हुनर है,
हर लड़ाई जीतना ही बहादुरी नहीं होता।
हमने छुपाए बहुत से जज़्बात मुस्कान के पीछे,
वर्ना आईने से रोज़ सच छुपाना आसान नहीं होता।
फिर भी उम्मीद की एक किरण बचा कर रखी है,
दिल के किसी कोने में ज़िद जगा कर रखी है।
एक दिन ये मुस्कान आदत नहीं, सच बन जाएगी,
क्योंकि हर अंधेरे का सफ़र अनंत नहीं होता।
हमने छुपाए बहुत से जज़्बात मुस्कान के पीछे,
वर्ना आईने से रोज़ सच छुपाना आसान नहीं होता।