Image by Ben Kerckx from Pixabay
अस्वीकरण से होता है इंसान को दर्द,
कभी- कभी हो जाती पार सारी हद।
अस्वीकरण से होता है इंसान निराश,
नई उम्मीद से मिट जाएगी हताश।
अस्वीकरण से होता है इंसान में बदलाव,
बनेगी नई ऊर्जा और ख़तम होगा इंसान के अंदर की बुराई।
अस्वीकरण दे जाति है इंसान को घाव,
इससे बनती हैं इंसान में अच्छे होने का दबाव।
अस्वीकरण से मिलता है इंसान को ठोकरों से मौका,
इसे बदलो स्वीकरण में जैसे एक पलकों में हवा को झोंका।
अस्वीकरण से मिलता है इंसान को स्वीकरण धीरे-धीरे,
जिंदगी करो शुरू नहीं सीरे से।