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लड़कियों,
तुम्हें हमेशा गंगा और यमुना सा पवित्र होना सिखाया गया,
पर मैं कहता हूँ —
कभी नर्मदा सी भी बनना।
जब ज़माना एक ही दिशा में बहता चला जाए,
तो तुममें विपरीत बहने का साहस हो।
भीड़ से अलग,
अकेली सही…
पर अपने आत्मविश्वास की धारा में बहती रहना।
पत्थर मिलें तो रुकना नहीं,
उन्हें छूकर और पवित्र हो जाना।
क्योंकि नर्मदा की तरह
तुम्हारा भी कंकर-कंकर शंकर है,
और तुम्हारा अस्तित्व
सदैव पूजनीय है।