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कर्म की चिट्ठी सही पते पर जाती है!

जिसने भेजा था उसी के पास लौट आती है!!

वक्त आने पर कर्म, रूप ऐ कर्म जवाब जरूर देता है!
हँसकर किया हुआ पाप तुम्हें कल अवश्य रुलाता है!
कर्म चाहे कहीं पर किया हो, दंड अवश्य मिलता है!
वक्त गूंगा नहीं है, जनाब, वक्त आने पर बोलता है!!

माना कि तुम चतुर चातुर्य हो, पर वक्त से बढ़ कर नहीं!
आने दो वक्त दिखेगा नजारा,
होगा वहीं पर तुम्हारे कर्मों से हटकर नहीं .......!!
जय मां भगवती........!!

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