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दुनिया का इकलौता ऐसा बंधन,
जहाँ जात-पात या मजहब का कोई भेद नहीं होता।
यह तो बस एक दिल का दूसरे दिल से,
शब्दों से परे... एक निस्वार्थ जुड़ाव होता है।
अनजान चेहरे कब जिंदगी का
अटूट हिस्सा बन जाते हैं, पता ही नहीं चलता।
कुछ पल के लिए मिले लोग,
कब पूरी जिंदगी बन जाते हैं,पता ही नहीं चलता।
शुरुआत में सिर्फ 'हाल-चाल' पूछने वाले, कब
हर सुख-दुख के हमसाए बन जाते हैं,
और हमारे अधूरेपन को इतनी सहजता से
मुकम्मल कर जाते हैं, पता ही नहीं चलता।
पर... उम्र भर की सौगातें देकर, जब वो खामोशी से बिछड़ते हैं,
तो जिंदगी कितनी तन्हा हो जाती है… पता ही नहीं चलता।
अब अगर बात मैं अपनी करूँ, तो मैं नवोदय विद्यालय से हूँ,
जहाँ दोस्ती का रिश्ता ही सबसे सर्वोपरि होता है।
घर से दूर, उस हॉस्टल की चारदीवारी में,
माता-पिता, भाई-बहन... सब रिश्ते वो दोस्त ही निभाते हैं।
वो एक ऐसी हसीन और मुकम्मल दुनिया है,
जिसके बिना आज भी हर याद वीरान सी है।
दोस्त हों तो मेरे नवोदय वाले दोस्त जैसे,
जिन्होंने बिछड़कर भी ताउम्र साथ निभाया है,
मेरी हर मुश्किल में, जिन्होंने मेरा हाथ थामा है।
दोस्त हो तो उर्वशी जैसी...
जिससे मैंने अपने दिल का हर सुख-दुख बांटा है,
जो सखी के रूप में, मेरे जीवन का सौभाग्य बनकर आई है।
दोस्त हो तो भूमिका जैसी...
जिसने मेरी हर अनकही खामोशी को भी सुना है,
और अपनी समझदारी से, हर मुश्किल को आसान बनाया है।
दोस्त हो तो प्राची जैसी...
जिससे दोस्ती की शुरुआत देर से हुई, मगर बेहद गहरी हुई,
वो चंचल सी, मासूम सी, मेरी प्यारी सखी है।
दोस्त हो तो अंजलि जैसी...
जिसके बिना मेरा नवोदय का सफर अधूरा था, और हम आज भी एक-दूजे के बिना अधूरे हैं।
दोस्त हो तो महक जैसी...
जिसकी बातों की मिठास और हाथों का स्वाद (खाना),
आज भी आँखों में यादें बनकर तैर जाता है।
दोस्त हो तो निधि जैसी...
बेड पार्टनर से लेकर क्राइम पार्टनर तक का सफर जिसने तय किया,
उसकी बेइंतहा केयर और परवाह के लिए
मैं आज भी दिल से आभारी हूँ।
दोस्त हो तो क्रिशिता जैसी...
जिसकी प्यारी और नटखट बातें, आज भी
मायूस होठों पर मुस्कान ला देती है।
दोस्त हो तो रागिनी जैसी...
चुलबुली सी, चंचल सी... जिसने अपनी अद्भुत
योगा प्रतिभा से हर किसी का मन जीता है।
दोस्त हो तो दिक्षिता जैसी...
बातों में सबसे माहिर, और खूबसूरती से
साड़ी पहनाने की अनूठी कला में भी।
दोस्त हो तो सोनल जैसी...
जिसकी गहरी बातें और कविता लिखने का हुनर,
आज भी मेरे हृदय को सुकून पहुँचा जाता है।
और मेरी अन्य सभी प्रिय सखियों...
आप सब का स्थान भी मेरे दिल में सर्वोच्च है।
मैं सदा-सदा के लिए आभारी रहूँगी,
उस निस्वार्थ प्यार, मदद और अपनेपन के लिए,
जो आप सब की दोस्ती ने मुझे दिया।
आपकी उन अनगिनत खूबियों को शब्दों में ढाल सकूँ,
मुझमें शायद इतनी क्षमता नहीं...
बस इस भावुक हृदय की गहराइयों से,
आप सबको धन्यवाद कहने की एक छोटी-सी ख्वाहिश है।
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