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कभी सोचा न था,
सोचा न था कुछ यूँ—
ज़िंदगी दिखाएगी अपने मायने,
कुछ यूँ सताएगी,
कुछ यूँ समझाएगी,
कि ढाल लेगी अपने ही ढाँचे में।
आज मुस्कुराहट उधार लेकर,
कल सीख के साथ उसे लौटाकर,
हर परिस्थिति के सामने
मज़बूती से खड़े रहना
सीखा ही देगी ये ज़िंदगी।

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