यह कहानी है उस महायुद्ध की,
जिसका कारण शायद कोई एक व्यक्ति नहीं था,
आइए जानने का प्रयास करें उस महागाथा को,
जिसने बदला भारतवर्ष का इतिहास था।
वचन माँगा था केवटराज ने,
तो भीष्म प्रतिज्ञा देवव्रत की क्यों?
काशीकन्याओं का हरण किया भीष्म ने,
तो शिखंडी रूप अंबा का क्यों?
सूर्यपुत्र का त्याग किया था कुंती ने,
तो सूतपुत्र की पहचान कर्ण की क्यों?
द्वेष करना हो तो अपने अवगुणों से,
कौरवों की शत्रुता पांडवों से क्यों?
गुरुदक्षिणा का मान रखने के लिए,
अंगूठा एकलव्य का ही क्यों?
पति को सही मार्ग दिखाने की बजाय,
चुना गांधारी ने जीवनभर अंधकार क्यों?
प्रतिशोध की ज्वाला थी शकुनि की,
तो उस आग में जला था हस्तिनापुर क्यों?
बिन देखे वचन निकले माता कुंती से,
तो पांचाली का विवाह पांचों पांडवों से क्यों?
द्यूत के उस खेल में हारे थे पांडव सब कुछ,
तो बिना अधिकार, दांव पर लगा था पांचाली का सम्मान क्यों?
अधर्मियों से भरी उस सभा में, धर्म के नाम पर अपमान क्यों?
वो वीर, पराक्रमी पांडव भी बैठे थे शीश झुकाए क्यों?
और धर्म के वे महाज्ञानी, देखकर भी ये अधर्म रहे थे मौन क्यों?
जब रचा गया वो चक्रव्यूह, छल से घिरे वो सात द्वार थे,
तो सात महारथियों के बीच अकेला वो बालक अभिमन्यु क्यों?
द्रौपदी के खुले केशों की प्रतिज्ञा थी,
तो रक्त से पूरा हुआ वो संकल्प क्यों?
प्रतिशोध की अग्नि में जलते हुए,
भूल गये सब मानवता का धर्म क्यों?
अंत में छाया विनाश था चारों ओर, जब शांत हुई रणभूमि, तब शेष बची बस राख थी,
पांडवों की उस जीत में भी, एक बड़ी हार छुपी थी।
धर्म की स्थापना करने वाले को ही, युद्ध का कारण कह दिया क्यों?
दोष था दुर्योधन का और अहंकार का,
तो गांधारी ने दिया यदुवंश के नाश का श्राप क्यों?
हर मांग का सिंदूर उजड़ा, रोई गांधारी-कुंती-उत्तरा,
जब लाशों पर ही राज मिला, तो वो जीत का उल्लास क्यों?
अंधकार और प्रतिशोध की अग्नि में, जल उठा पूरा आर्यावर्त क्यों?
एक परिवार के आपसी युद्ध में, रची गई इतनी विशाल महाभारत क्यों?