Image by Pexels from Pixabay

तुझे सखी कहूँ या सौभाग्य कहूँ,
तू है मेरे जीवन का सवेरा,
मेरे उलझे मन का तू ही बसेरा।

जानती हूँ तुझे पिछले आठ सालों से,
पर लगता है जैसे संग हो जन्मों से।
माना कि शुरुआत थोड़ी तीखी थी,
लड़ते-झगड़ते, रूठते-मनाते
आज एक-दूजे के सुख-दुख में
कदम से कदम मिलाते।

करती हूँ सच्चे हृदय से आभार तेरा,
सखी के रूप में बहन का प्यार पाया है।
इसीलिए तो बार-बार कहती हूँ—
तुझे सखी कहूँ
या अपना सौभाग्य मानूँ मैं।

.    .    .

Discus