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ये जिंदगी क्या है?
कल के पछतावे या भविष्य की चिंता में जीना
या वर्तमान के इस पल को खुलकर जीना है ज़िन्दगी..
भागादौड़ भरी दुनिया में,
झूठी मुस्कान सजाए उन मुखौटो में,
खुद को पहचानना है ज़िन्दगी..
बीते कल से नई सीख लेकर
आने वाले कल को बेहतर बनाना है ज़िन्दगी..
ठोकर लगने के बाद भी फिर से उठना है ज़िन्दगी..
उतार - चढ़ाव, हार - जीत से परे उठकर,
हर पल का उत्सव मनाना है ज़िन्दगी..
दुनिया के मापदंडों की बेड़ियां तोड़कर,
अपनी इच्छा के मुताबिक जी लेना है ज़िन्दगी..
अक्सर वो नहीं मिलता जो हमें चाहिए,
जो हमारे लिए सही है, वही देती है ज़िन्दगी।
यह कोई मंज़िल नहीं जहां ठहर जाएं,
अनोखे पड़ावों का एक हसीन सफर है ज़िन्दगी।
माना कि इतना आसान भी नहीं होता ये सफर जिन्दगी का,
लेकिन यही सफर हमें इतना काबिल बना देता है,
कि हर कठिनाई भी आसान लगने लगती है।
ये जिन्दगी अपने आप में अनेक रहस्यों से उलझी हुई है,
हर सुबह चुनौती, हर शाम एक सबक है ज़िन्दगी।
हर उगते सूरज के साथ ये देती एक नया अवसर,
कि जी ले खुलकर इस जिंदगी को,
अगर बाँट सको खुशियां और कर सको शुक्रिया,
तो समझो.. तुमसे बहुत खुश है तुम्हारी ज़िन्दगी।