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जहां हर आक्ष आज़ादी की पुकार लगाता है
मेरा मन बस उस सुनहरे सपने का नक्शा आज भी तरसता है
सलाम उस हर जवान को जिसने अपने फ़र्ज़ के लिए खुदको कुर्बान किया है
सलाम उस हर हिंदुस्तानी को जिसने अपनी रूह को अपने देश के नाम किया है
जहां हर फ़ल्साफ़े में उन्नति का नूर हो
जहां हर एक इंसान को हिंदुस्तानी होने का गुरूर हो
जहां आज़ाद सोच, आज़ाद सपने, आज़ाद मज़िले और आज़ाद ख़यालों को बिना डरे बुन सके, मुझे उस पल की आस है
जहां मेरा देश उसके सुनहरे मुस्तकबिल में अपने कदम रखे, मुझे बस अब उस दौर में ढलने की तलाश है
बस अब मुझे उस दौर में ढलने की तलाश है