आज 26 जनवरी है
गणतंत्र दिवस है
कर्तव्य पथ तैयार है
शहीद सेनानियों कि कुर्बानियाँ याद किये
नम ह्रदय वंदन कर रहे है
Gen. W. X. Y ध्वजवंदन कर रही है
Gen. Z कहाँ है?
शायद सो रही है
क्यूँ?
उसे पकी पकाई आजादी मिली हुई है
इसलिए ये एक दिन के पब्लिक होलीडे पे सो रही है
या आउटिंग पे निकल गई है
तिरंगा वो ही अपने चिर परिचित अंदाज में मौन खड़ा है
बदलते भारत कि तस्वीर देख रहा है
न हंस रहा है न रो रहा है
शून्य में नजर गड़ाए स्तब्ध खड़ा बहुत कुछ सोच रहा है
यह Gen. Z. तो सम्पूर्ण भारतीय है
इटली से नहीं आई है
फिर भी अपने देश कि रक्तानलिकाओं में
प्रवेश कर चूके जहरीले तत्वों प्रति उदासीन क्यूँ है?
क्या उन्हें मालूम है उनके आसपास क्या हो रहा है?
उनकी जनरेशन के कुछ डॉक्टर छिपकर जिहाद कर रहे है
कुछ सिस्टम में घुसकर निरंतर बग फैला रहे है
भ्रामक झूठ का अविरत प्रचार करना,
विदेश जाकर देश विरुद्ध शड़यंत्र करना
नेतालोग का नया ऐजण्डा हो गया है
संस्कृति और सभ्यता से भयानक खिलवाड़ करते हुए
उनके सत्य क़ो फरेब के वस्त्र में लिपटा जा रहा है
ठीक है. हम जानते है तुम्हारी एक अलग ही दुनिया है
जो पश्चिम कि भाषा में शिक्षा लेकर उनकी ओर झूकी हुई है
तुम्हारे भीतर भी अँगारे तले ज्वाला सुलग रही है
तुम्हेँ भी देश से, सिस्टम में बहुत फरियादें है
हम जानते है. हम सिर्फ इतना ही चाहते है कि
तुम्हारी सोच, सभ्यता और संस्कृति में
हमारे देश के मूल्यों क़ो महकने दो.
पुरानी जनरेशन कि तुलना में तुम अधिक मुक्त हो.
A. I. तुम्हारी प्रतिभा में चमक मिला रहा है.
तुम्हेँ वो सबकुछ आसानी से मिल रहा है जिनके लिये
सम्पूर्ण मानवजाती ने अविरत संघर्ष किये.
तुम खुश रहो. आबाद रहो. पर एकबात याद रखो
प्रथम देश, धर्म और संस्कृति के मूल्यों का जतन करो
तिरंगे क़ो उपहार में संतुष्ट मुस्कान भेंट धरो
जय हिन्द.