Source: Tima Miroshnichenko on Pexels.com मैंने लोरी देकर सुलाया था,
वह नींद कहाँ से आई?
मेरा सूरज घर से निकला था,
फिर लौट के क्यों न आया?
वह कहता था—"अम्मा, सुनना,
सफ़ेद कोट मैं लाऊँगा।
तेरे झुर्रियों वाले चेहरे पर,
खुशियों का रंग सजाऊँगा।"
मैं हँसकर उसके माथे पर,
दुआओँ का फूल सजाती थी।
हर सजदे में उसके हिस्से की,
रहमत माँगने जाती थी।
रोटी आधी मैं खाती थी,
आधी उसको देती थी।
अपने सारे अरमानों की,
चादर उस पर बिछाती थी।
मेरे कंगन बिकते जाते,
उसकी किताबें आती थीं।
मेरी साड़ी पुरानी होती,
नई कॉपियाँ मुस्काती थीं।
सर्दी, गर्मी, बरसातों में,
वह बस पढ़ता जाता था।
हर आँसू को आँखों में ही,
चुपके-चुपके पी जाता था।
कहता था—"बस इस बार, अम्मा,
नीट अगर हो जाएगा।
तेरे पैरों की सारी थकन,
मुझसे दूर हो जाएगा।"
मैंने कहा—"मेहनत, बेटा,
कभी नहीं बेकार गई।"
मुझको क्या मालूम था किस्मत,
रिश्वत के दरबार गई।
जिसने रातें जागकर काटीं,
वह पीछे क्यों रह जाता?
जिसने प्रश्न खरीदे पैसों से,
वह आगे क्यों बढ़ जाता?
जिसने सच को थाम रखा था,
उसका सिर ही झुकना था?
क्या मेहनत की कीमत केवल,
आँसू बनकर बहना था?
उस दिन घर में सन्नाटा था,
दरवाज़ा भी रोता था।
मेरा बच्चा चुप बैठा था,
या रब! दिल क्यों खोता था?
उसकी मेज़ पर खुली किताबें,
मुझसे बातें करती थीं।
सूखी स्याही की हर बूँद,
चुपचाप आहें भरती थी।
एक काग़ज़ पर लिखा हुआ था—
"अम्मा! मुझको माफ़ करो।
मैं लड़ते-लड़ते थक बैठा,
अब तुम मुझको माफ़ करो।"
मैंने चीख़ के रब से पूछा—
मेरा बेटा दोषी था?
या इस झूठी दुनिया में बस,
ईमानदार ही दोषी था?
मैंने उसको जन्म दिया था,
मरने को नहीं भेजा।
डॉक्टर बनकर लौटेगा वह,
बस इतना ही था सपना।
आज खिलौने चुप बैठे हैं,
किताबें मुँह लटकाए हैं।
उसके कमरे की दीवारें भी,
आँसू बनकर आई हैं।
उसकी कुर्सी रोज़ मुझे अब,
दरवाज़े तक लाती है।
हर आहट पर मेरा दिल भी,
उसको ढूँढ़ने जाता है।
सुन लो ऐ कुर्सी वालों, तुम
कानों में यह बात रखो।
पेपर केवल लीक नहीं होता,
माँ का विश्वास भी मत तोड़ो।
जब प्रश्नों का सौदा होता,
सपनों का व्यापार होता।
एक नहीं, सौ घर उजड़ते,
हर माँ का संसार रोता।
किसी किसान की मेहनत जलती,
किसी मज़दूर की रोटी।
किसी बहन के टूटते कंगन,
किसी माँ की सूनी गोदी।
मेरी कोख़ नहीं रोती है,
पूरा भारत रोता है।
जब मेहनत से पहले पैसा,
मंज़िल तक जा पहुँचता है।
अब कोई बेटा यूँ न टूटे,
बस इतनी फ़रियाद मेरी।
हर मेहनतकश बच्चे की हो,
कल से नई शुरुआत फिर।
मेरी गोद भले सूनी है,
पर इतना एहसान करो।
जिस दर्द से मैं गुज़री हूँ,
उससे हर माँ को बचा लो।
याद रहे ऐ दुनिया वालो,
यह केवल एक नाम नहीं।
जब बेटा टूटकर मरता है,
मरती केवल जान नहीं।
मर जाती हैं लाख दुआएँ,
मरते हैं अरमान सभी।
एक बच्चे के जाने से ही,
मर जाती है माँ भी वहीं।
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