वर्तमान में एक न्‍यायालयीन प्रकरण का निर्णय समाचार पत्रों के माध्‍यम से पढ़ने में आया जो था, मध्‍य प्रदेश उच्‍च न्‍यायालय, इंदौर पीठ ने गोरी सक्‍सेना बनाम मध्‍य प्रदेश राज्‍य निदेशालय आयुष और अन्‍य, रिट याचिका संख्‍या 28689/2022 में पारित किया है।

उक्‍त प्रकरण का सारांश इस प्रकार है कि याचिकाकर्ता एक स्‍टाफ नर्स है, जिसे परिवार नियोजन कार्यक्रम को बढ़ावा देने और सरकारी कर्मचारियों को नसबंदी के लिए प्रोत्‍साहित करने के उद्देश्‍य से एक सरकारी परिपत्र (दिनांक 25 जुलाई, 2001) के आधार पर अग्रिम वेतन वृद्धि प्रदान की गई थी। अग्रिम वेतन वृद्धि के संबंध में आदेश 2013 में पारित किया गया था। हालांकि, 2022 में याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया गया और सुनवाई का कोई अवसर दिए बिना उसके खिलाफ 2,51,038 रूपये की वसूली की गई।

इसके अलावा आदेश के माध्‍यम से एक और मांग नोटिस भी जारी किया गया जिसमें कहा गया कि चूंकि याचिकाकर्ता ने 24 फरवरी 2010 से पहले ही अपना ऑपरेशन करवा लिया था इसलिए वह 2013 में उसे दिए गए लाभ की हकदार नहीं है।

जिसमें माननीय न्‍यायालय द्वारा निर्णय लिया गया कि यदि कोई समाजसेवी व्‍यक्ति (शासकीय कर्मचारी हो अथवा नही) नि:स्‍वार्थ भाव से परिवार नियोजन के लिए नसबंदी करवाता है, तो ऐसे व्‍यक्ति को बाद में परिवार नियोजन अपनाने वाले शासकीय कर्मचारियों को मिलने वाली अग्रिम वेतन वृद्धि की सरकारी योजना के तहत किसी भी लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता ।

ऐसा करते हुए न्‍यायालय ने स्‍पष्‍ट किया है कि ऐसा व्‍यक्ति भी लाभ का हकदार है, भले ही उसने सरकारी सेवा में आने से पहले ऐसे कार्य में योगदान दिया हो।

जस्टिस सुबोध अभ्‍यंकर की एकल पीठ ने कहा,

‘’यदि कोई जनहितैषी व्‍यक्ति, चाहे वह सरकारी कर्मचारी हो या न हो, नि:स्‍वार्थ भाव से परिवार नियोजन के लिए अपना ऑपरेशन करवाता है तो ऐसे व्‍यक्ति को उक्‍त परिपत्र के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता, जिसमें परिवार नियोजन अपनाने वाले सरकारी कर्मचारियों को अग्रिम वेतन वृद्धि का प्रावधान है। ऐसा इसलिए है क्‍योंकि सरकार अंतिम उद्देश्‍य केवल परिवार नियोजन का सहारा लेकर जन्‍म दर और जनसंख्‍या विस्‍फोट को नियंत्रित करना है, और यदि कोई व्‍यक्ति सरकारी सेवा में न रहते हुए भी उद्देश्‍य में योगदान देता है और बाद में उसी में शामिल होता है तो वह सेवानिवृत्ति खंड में सरकार की मदद करने के अपने परोपकारी कार्य के लाभ का भी हकदार है।‘’

याचिकाकर्ता के वकील ने प्रस्‍तुत किया कि 25 जुलाई,2001 के परिपत्र में स्‍पष्‍ट रूप से प्रावधान है कि परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए सरकार नसबंदी के लिए सहमत होने वाले व्‍यक्ति को अग्रिम वेतन वृद्धि प्रदान कर रही है। यह भी प्रस्‍तुत किया गया कि यह मानते हुए भी यदि कि याचिकाकर्ता को उपरोक्‍त परिपत्र की गलत व्‍याख्‍या के कारण अग्रिम वेतन वृद्धि प्रदान की गई थी तो भी इतनी लंबी अवधि के बाद राशि की वसूली नहीं की जा सकती क्‍योंकि याचिकाकर्ता द्वारा तथ्‍यों को छिपाया नहीं गया था।

इसके विपरीत प्रतिवादी/राज्‍य के वकील ने प्रस्‍तुत किया कि उक्‍त परिपत्र में यह पूर्व शर्त थी कि ऐसा व्‍यक्ति, जिसने अपना ऑपरेशन करवाया है, आपरेशन के समय लोक सेवक होना चाहिए।

उपर्युक्‍त परिपत्रों के अवलोकन के बाद न्‍यायालय ने कहा ,

‘’राज्‍य सरकार द्वारा परिपत्र केवल अपने परिवार नियोजन को कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए जारी किया गया है और ऐसी परिस्थितियों में यदि कोई व्‍यक्ति अपनी नियुक्ति से पहले नसबंदी का सहारा लेकर परिवार नियोजन के लिए कदम उठा चुका है और बाद में सरकारी सेवा में नियुक्‍त होता है, तो यह नहीं कहा जा सकता है वह सरकार के परिवार नियोजन कार्यक्रम को बढ़ावा नहीं दे रहा है।‘’

न्‍यायालय ने कहा कि भले ही किसी व्‍यक्‍त‍ि ने परिवार नियोजन के लिए नसबंदी का विकल्‍प चुना हो, जबकि वह सरकारी सेवा में नही था लेकिन बाद में उसी में शामिल हो जाता है, तो वह ऐसी योजना के तहत लाभ का हकदार होगा।

इसके अलावा याचिकाकर्ता के विरूद्ध वसूली के आदेश के संबंध में इस आधार पर कि उसे अग्रिम वेतन वृद्धि गलत तरीके से दी गई है, अदालत ने थॉमस डैनियल बनाम केरल राज्‍य और अन्‍य 2022 एससीसी ऑनलाईन एससी 536 का हवाला दिया।

इसमें यह माना गया,

‘’यदि नियोक्‍ता द्वारा वेतन/भत्‍ते की गणना के लिए गलत सिद्धांत लागू करके या नियम/आदेश की किसी विशेष व्‍याख्‍या के आधार पर ऐसा अत‍िरिक्‍त भुगतान किया था, जिसे बाद में गलत पाया जाता है, तो परिलब्धियों या भत्‍तों का ऐसा अत‍िरिक्‍त भुगतान वसूली योग्‍य नहीं है।‘’

इसलिए याचिका को अनुमति दी गई और आरोपित आदेशों को रद्द कर दिया गया।

उक्‍त प्रकरण को पढ़ने के बाद लगा कि इस बारे में अधिक जानकारी प्राप्‍त करनी चाहिए, कि मध्‍य प्रदेश शासन में परिवार कल्‍याण कार्यक्रम के अंतर्गत अग्रिम वेतन वृद्धियों के संबंध में क्‍या प्रावधान है।

इस संबंध में जो प्रावधान ज्ञात हुए, उनका सार इस प्रकार है:-

सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर इस संबंध में ज्ञापन क्रमश: 

  • क्रमांक 46/91/1/3/79 दिनांक 29/01/1979
  • क्रमांक 383/432/1/3/79 दिनांक 24/08/79
  • क्रमांक 408/629/1/3/79 दिनांक 27/09/79
  • क्रमांक 473/629/1/3/79 दिनांक 20/11/1979
  • क्रमांक 10/79/1/3/80 दिनांक 20/02/1980
  • क्रमांक 299/324/1/3/81 दिनांक 20/07/19891
  • क्रमांक 528/845/1/3/81 दिनांक 22/12/1982
  • क्रमांक सी-3-44/83/3/1 दिनांक 13/01/1984
  • क्रमांक सी-3-19/84/3/1 दिनांक 27/06/1984
  • क्रमांक सी-3-14/86/3/1 दिनांक 21/04/1988
  • क्रमांक सी-3-13/95/3/1 दिनांक 25/07/1995 

जारी किये गये हैं।

मध्‍य प्रदेश शासन, सामान्‍य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, वल्‍लभ भवन, भोपाल के परिपत्र क्रमांक सी-3/4/2004/3/एक भोपाल दिनांक 14/09/2006 के माध्‍यम से शासकीय सेवकों द्वारा स्‍वयं या पत‍ि/पत्नि का परिवार कल्‍याण कार्यक्रम के अंतर्गत नसबंदी ऑपरेशन कराने पर अग्रिम वेतन वृद्धियों का प्रावधान किया गया है।

राज्‍य शासन द्वारा परिवार कल्‍याण कार्यक्रम को प्रोत्‍साहित करने की दृष्टि से नसबंदी/ऑपरेशन कराने वाले शासकीय सेवकों को अग्रिम वेतनवृद्वि स्‍वीकृत करने संबंधी योजना दिनांक 15/01/1979 से लागू की गई थी। परिपत्र क्रमांक 46/91/1/3/79 दिनांक 29/01/1979 में शासकीय सेवकों द्वारा स्‍वयं अथवा पत‍ि/पत्नि का दो जीवित बच्‍चों के बाद नसबंदी ऑपरेशन कराने पर दो अग्रिम वेतनवृद्वियों तथा तीन जीवित बच्‍चों के बाद नसबंदी ऑपरेशन कराने पर एक वेतनवृद्धि का प्रावधान किया गया था।

परिपत्र क्रमांक सी-3/9/2001/1/3 दिनांक 07/08/2001 द्वारा उपरोक्‍त नीत‍ि में संशोधन करते हुए एक जीवित बच्‍चे के बाद नसबन्‍दी/ऑपरेशन कराने पर दो अग्रिम वेतनवृद्धियां तथा दो जीवित बच्‍चों के बाद नसबन्‍दी ऑपरेशन कराने पर एक वेतनवृद्धि देने का प्रावधान किया गया है।

शासन की नीति के अंतर्गत उपरोक्‍त स्‍वीकृत अग्रिम वेतनवृद्धि को जोड़कर शासकीय सेवक का वेतन निर्धारित किया जाता है, जो भविष्‍य में शासकीय सेवक की पदोन्‍नत‍ि होने अथवा वेतनमान पुनरीक्षित होने पर यह वेतनवृद्धि उसी में समाहित हो जाती है।

शासकीय सेवकों द्वारा इस संबंध में विभिन्‍न न्‍यायालयों में याचिकाएं दायर की हैं। कुछ प्रकरणों में माननीय न्‍यायालय द्वारा यह अभिनिर्धारित किया है कि स्‍वीकृत अग्रिम वेतनवृद्धियां संबंधित शासकीय सेवक का ‘’व्‍यक्तिगत वेतन’’ माना जाना चाहिए।

राज्‍य शासन द्वारा वर्तमान व्‍यवस्‍था परिपत्र क्रमांक सी-3/9/2001/1/3 दिनांक 07/08/2001 द्वारा निर्धारित को यथावत् रखते हुए निर्णय लिया गया है कि जिन शासकीय सेवकों द्वारा पूर्व में परिवार कल्‍याण कार्यक्रम शासन के उक्‍त निर्देशानुसार अपनाया गया है, उनमें से केवल उन्‍हीं शासकीय सेवकों की वेतनवृद्धि व्‍यक्तिगत वेतन मान्‍य की जावे, जिन्‍हें माननीय न्‍यायालयों से आदेश प्राप्‍त हो गए हैं एवं अपील की समय-सीमा निकल गई है। जिन प्रकरणों में अपील की समय-सीमा है, उनमें संबंधित विभाग विधि विभाग से परामर्श कर उपरोक्‍त विषयक् न्‍यायालयीन आदेश के विरुद्ध अपील/याचिका दायर करने की कार्यवाही तत्‍काल की जाए। शेष शासकीय सेवकों को उक्‍त वेतनवृद्धि व्‍यक्तिगत वेतन मान्‍य नहीं किया जावे।

वर्तमान में मध्‍य प्रदेश सामान्‍य प्रशासन विभाग मंत्रालय, परिपत्र क्रमांक सी-3-11/2016/1/3, भोपाल दिनांक 09 फरवरी 2017 द्वारा राज्‍य शासन द्वारा परिवार कल्‍याण कार्यक्रम के अंतर्गत शासकीय सेवकों द्वारा स्‍वयं या पत‍ि /पत्नि की नसबंदी कराने पर प्रोत्‍साहन स्‍वरूप दी जाने वाली अग्रिम वेतन वृद्वियों की पूर्व व्‍यवस्‍था में निम्‍नानुसार परिवर्तन कर दिया गया है:-

  1. एक जीवित संतान के बाद स्‍वयं या पत‍ि /पत्‍नी की नसबंदी कराने पर दो अग्रिम वेतन वृद्धि दिये जाने संबंधी सुविधा यथावत रहेगी।
  2. दो जीवित संतान के पश्‍चात् नसबंदी कराये जाने पर एक अग्रिम वेतन वृद्धि की सुविधा तत्‍काल प्रभाव से समाप्‍त की जाती है।

इसके अत‍िरिक्‍त मध्‍य प्रदेश शासन सामान्‍य प्रशासन विभाग, मंत्रालय परिपत्र क्रमांक सी-3-11/2016/1/3, भोपाल दिनांक 11 जुलाई 2019 द्वारा ऊपर वर्णित परिपत्र दिनांक 09 फरवरी 2017 में यह और जोड़ा गया कि ‘’परिवार कल्‍याण कार्यक्रम के अंतर्गत शासकीय सेवकों द्वारा स्‍वयं या पत‍ि/पत्नि की नसबंदी कराने पर प्रोत्‍साहन स्‍वरूप दी जाने वाली वेतन वृद्धियों के संबंध में यह निर्णय लिया गया है कि प्रथम प्रसूत‍ि में जुड़वा संतान पैदा होने के उपरांत नसबंदी कराये जाने पर शासकीय सेवक को उसी प्रकार अग्रिम वेतन वृद्धि की पात्रता होगी, जैसा कि एक एक जीवित संतान होने के बाद नसबंदी कराने पर दो अग्रिम वेतन वृद्धि की सुविधा देय है।

इस प्रकार वर्तमान नियम अनुसार एक जीवित संतान होने पर दो अग्रिम वेतनवृद्धि का प्रावधान है तथा प्रथम बार में जुड़वा संतान होने पर नसबंदी कराये जाने पर दो संतान होने पर भी दो अग्रिम वेतन वृद्धि की पात्रता होगी।

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