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मध्य प्रदेश शासन में वर्तमान में कई प्रकार के नियमों में संशोधन किये जा रहे हैं। विशेषकर शासकीय कर्मचारियों की सेवाओं से संबंधित नियम। उन्हीं में से एक नियम है शासकीय संतानों की अधिकतम संख्या के संबंध में। उक्त नियमानुसार मध्य प्रदेश की शासकीय सेवा में आने के लिये एक शर्त रखी गई कि जीवित संतानों की संख्या दो से अधिक नहीं होनी चाहिए। यदि किसी की दो से अधिक जीवित संतान है तो वह शासकीय सेवा में आने के लिये अपात्र हो जाता है। वर्तमान में उक्त नियम में संशोधन किये जाने के संबंध में चर्चा चल रही है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ इस तरह का प्रावधान हटा चुके हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय वल्लभ भवन, भोपाल दिनांक 10 मार्च 2000 क्र. एफ. सी. 3-3-2000-3एक. – भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के परंतुक द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, मध्य प्रदेश के राज्यपाल, एतद्द्वारा मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्ते) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए उक्त नियमों में, नियम 6 के उपनियम (4) के पश्चात् उपनियम (5) एवं (6) जोड़ा गया। जिसके अंतर्गत उपनियम (6) अनुसार कोई भी उम्मीदवार जिसकी दो से अधिक जीवित संतान है, जिनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके पश्चात् हो, किसी सेवा या पद नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। किंतु इसका एक अपवाद भी है मध्य प्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय क्रमांक सी 3-12/2013/1/3, भोपाल दिनांक 29 सितम्बर 2014 शासकीय सेवक की सेवाकाल में मृत्यु होने पर अनुकंपा नियुक्ति अंतर्गत भाग 6 अनुकंपा नियुक्ति की आवश्यक अर्हताएं तथा शिथिलीकरण में बिन्दु क्रमांक 6.6. में मध्य प्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 1961 के नियम 6 के उपनियम 6 के प्रावधान कि कोई भी उम्मीदवार जिसकी दो से अधिक संतान जीवित होने पर एक का जन्म यदि 26 जनवरी 2001 को या उसके उसके पश्चात् हुआ हो, किसी भी शासकीय सेवा या पद पर नियुक्ति के लिये अपात्र माना जावेगा, से अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों में छूट प्रदान की गई है।
उक्त प्रावधान के कारण मध्य प्रदेश में 26 जनवरी 2001 से तीसरी संतान होने पर अभ्यर्थी शासकीय सेवा हेतु पात्र नहीं होंगे तथा जो पूर्व से शासकीय सेवा में हैं उनको सेवायें निर्धारित अवधि अर्थात 26 जनवरी 2001 के बाद तीसरी संतान होने पर समाप्त करने का प्रावधान है। इस नियम के कारण कई शासकीय सेवकों को तीसरी संतान होने की जानकारी पाये जाने पर सेवा से निकाल दिया गया और प्रदेश के कई व्यक्ति अपात्र हो गये। उक्त नियम के आधार पर सेवा से पृथक किये जाने वालों में छतरपुर जिले की एक शिक्षिका, आगर मालवा की शिक्षिका और एक जज भी सम्मिलित हैं।
इस प्रकार का एक प्रकरण सामने आया था, जिसमें उक्त मध्य प्रदेश सिविल सेवा, 1961 नियम 6 के संशोधित प्रावधान अंतर्गत माध्यमिक विद्यालय आगर मालवा बीजा नगरी की केमस्ट्री शिक्षिका रहमत बानो मंसूरी जो कि संविदा वर्ग 2 में 2003 से कार्यरत थी, उन्हें तीसरी संतान होने पर सेवा से पृथक कर दिया गया था। रहमत बानो द्वारा सेवा में वापस आने के लिये उच्च न्यायालय इंदौर में याचिका लगाई गई है। उनकी तीसरी संतान वर्ष 2009 में हुई थी। किंतु मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस संघ के पूर्व अध्यक्ष श्याम सिंह पंवार ने 2020 में पहली बार रहमत बानो की तीसरी संतान की शिकायत जिलाधिकारी कार्यालय में की थी। उक्त शिकायत की जॉंच करने के बाद संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग उज्जैन ने रहमत की सेवायें समाप्त कर दी थी।
रहमत बानो का कहना है कि मध्य प्रदेश में हजारों ऐसे प्रकरण हैं, उन्हीं के ब्लॉक में ही 34 ऐसे शिक्षक हैं जिनकी तीन या उससे अधिक संतानें हैं, पर उनके खिलाफ कोई कारवाई नहीं की गई, लेकिन उन्हें निशाना बनाया गया है। उनका कहना है कि कारवाई की जाना है तो सभी के विरुद्ध की जाए। इस प्रकरण में अधिकारियों का कहना है कि रहमत बानो के प्रकरण में शिकायत प्राप्त होने के कारण कारवाई की गई है। उक्त 34 शिक्षकों की सूची उनके द्वारा न्यायालय में भी प्रस्तुत की गई है। रहमत बानो का आगे यह भी कहना है कि उनकी एक बेटी और दो बेटे हैं, उनकी पहली संतान जो कि एक बेटी है उसका जन्म 2000 में हुआ था, अब वह बीएएमएस कर रही है, दूसरी संतान बेटा जिसका जन्म 2006 में हुआ है, वह कोटा से नीट की तैयारी कर रहा है, और तीसरे बेटे का जन्म 2009 में हुआ था जो कि दसवीं कक्षा का छात्र है। उनके पति सईद अहमद मंसूरी एक मदरसे में कार्य करते हैं, उन्हें लगभग 5000 से 6000 वेतन मिलता है। रहमत बानो पर ही मुख्य रूप से पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। उनकी नौकरी जाने से उनके लिए अपनी संतानों का भरण-पोषण आसान नही होगा। इसके साथ वह यह भी स्वीकार करती हैं कि दो से अधिक संतान होने पर नौकरी जाने के प्रावधान के संबंध में उन्हें जानकारी थी। किंतु उनको तीसरी संतान को जन्म इस कारण से देना पड़ा कि उनको बच्चे के गर्भ में आने की जानकारी बहुत देर से हुई। उक्त कारण से डॉक्टर ने गर्भपात करने से मना कर दिया था। डॉक्टर का कहना था कि गर्भपात से मॉं और बच्चे दोनों की जान खतरे में आ सकती है। रहमत बानो को आशा है कि न्यायालय उनके पक्ष में निर्णय लेगा। किंतु इस प्रश्न का उत्तर प्राप्त नहीं है कि रहमत बानो द्वारा ऐसी परिस्थिति के संबंध में कार्यालय को जानकारी प्रदान की गई थी या नहीं । उनका यह कहना सही हो सकता है, परंतु उनके द्वारा नियम की जानकारी थी कि तीसरी संतान होने पर उनकी सेवायें समाप्त की जा सकती है तो उनके द्वारा अपनी परिस्थिति से कार्यालय को अवगत कराया गया था अथवा नहीं या उनके द्वारा यह तथ्य छुपाया गया तथा शिकायत होने पर अपनी परिस्थिति के बारे में बताया गया। यदि उनके द्वारा इस प्रकार की स्थिति जब उत्पन्न हुई थी, तो उनको तद्समय कार्यालय को अवगत कराया होता तो शायद उनके विरुद्ध इस प्रकार की कार्यवाई नहीं होती। यह मात्र एक मत है। इसी प्रकार का एक अन्य प्रकरण भी हैं जिसमें विदिशा जिले में शिक्षा विभाग जिसमें 945 शिक्षकों को नोटिस दिया गया था।
इस प्रकार के ही एक प्रकरण में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ग्वालियर खंडपीठ का एक निर्णय है जिसके अनुसार 2 से अधिक संतान होने पर माता-पिता शासकीय सेवा के पात्र नहीं होगे। उक्त प्रकरण में मध्य प्रदेश बीज प्रमाणीकरण संस्था के विरुद्ध एक अभ्यर्थी लक्ष्मण सिंह बघेल ने न्यायालय में अपील की थी।
प्रकरण में लक्ष्मण सिंह बघेल ने व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा सहायक बीज प्रमाणीकरण अधिकारी के 112 पदों के लिये जारी विज्ञापन के आधार पर आवेदन किया था। आवेदन करने की अंतिम तिथि 30 जून 2009 थी। आवेदन के समय लक्ष्मण सिंह बघेल की 2 ही संतानें थी, उनकी तीसरी संतान का जन्म 20 नवंबर 2009 को हुआ था। उनका तर्क था कि आवेदन के समय उनकी दो ही संतानें थी तो उन्हें अपात्र न माना जाये। किंतु उच्च न्यायालय ने उनके तर्क को न मानते हुए एकल पीठ के आदेश को उचित माना और उनकी अपील को निरस्त कर दिया।
उक्त नियम को मध्य प्रदेश में समाप्त करने के लिये वर्तमान में कई प्रकार की चर्चायें चल रही हैं। नियम को समाप्त करने के लिये तर्क दिया जा रहा है, प्रजनन दर कम हो रही है। उक्त तर्क के समर्थन में ऑंकडे भी प्रस्तुत किये जा रहे हैं, जिसके अनुसार सितंबर 2025 में जारी सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) बुलेटिन 2023 के अनुसार मध्य प्रदेश की सकल प्रजनन दर (टीएफआर) 2.4 है अर्थात् एक दंपती औसतन 2.4 बच्चे कर रहे हैं। हालांकि, शहरी क्षेत्र में यह दर 1.8 और ग्रामीण क्षेत्र की 2.6 है । भारत की टीएफआर 1.9 है। राष्ट्रीय स्वंय संघ के सरसंघ संचालक मोहन भागवत काफी समय से प्रजनन दर के आधार पर तीन संतानों की मांग कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त तीन संतानों के संबंध में इस प्रकार के कई प्रकरण सामने आने पर सेवा से पृथक करने से कर्मचारियों में भी रोष है तथा उनके द्वारा उक्त नियम को समाप्त करने की सिफारिश की जा रही है।