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यादें कुछ, कुछ बातें हमारी 
आज लगती हैं बहुत ही प्यारी 
उन्हीं को याद कर 
सुनाती हूं कहानी हमारी 
सात साल का समय बीत गया ऐसे 
लगता है कल की ही बात हो जैसे 
छोटे बच्चे ही तो थे हम 
इतनी जल्दी बड़े हुए कैसे 
वक्त जाने का आ गया 
दूर जा रहे हैं आज तुमसे 
कई यादों के साथ 
कई फरियादों के बाद 
जा रहे हैं आज 
सात साल के बाद 
कब यहां से निकले 
सोचा करते थे 
छुट्टी पाने की कोशिश 
हंमेशा किया करते थे 
कब यहां से पीछा छुटे 
कब यह पिंजरा टुटे 
यही पिंजरा अच्छा लगता है अब 
जाने का समय आ गया है जब 
जा रहे हैं आज, सात साल के बाद 
कक्षा सातवीं में भी छठवीं का ग़म 
ज़रा भी नहीं हुआ कम 
कक्षा आठवीं में आया थोड़ा सुधार 
उतरा घर जाने का बुखार 
नौवीं कक्षा की कहानी तो थी ऐसी
कभी किसी ने भी सोची ना थी वैसी 
दसवीं बोर्ड देने का समय आया 
पहली बेच बनने का सौभाग्य पाया 
अब कक्षा ग्यारहवीं की कहानी की बारी 
शुरू होते ही खतम हो गई सारी 
आज कक्षा बारहवीं में हैं हम
जा रहे हैं आज, सात साल के बाद 
मन के साथ आज दूखी हैं ये दिल 
आज के बाद क्या मिलेंगे हम फिर 
दोस्तों को देख कर 
इस स्कूल को देख कर 
दूखी हैं मन आज 
जा रहे हैं आज ,सात साल के बाद 
टुट गया पिंजरा आज 
छुट गया दोस्तों का साथ 
रो कर जहा हंसे हैं हम 
भुलाना सीखें सारे ग़म 
जा रहे हैं आज 
सात साल के बाद 
दे रहे हैं आज धन्यवाद आज हम
उन सभी लोगों को 
जिन्होंने दिया हमारा पग-पग पर साथ
जा रहे हैं आज 
सात साल के बाद.

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