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जीवन सवालों की थैली नहीं,
जो कंधों पर लादे फिरते रहें,
यह तो अनुभवों की वह नदी है,
जिसमें बहकर हम खुद को समझें।

यह जन्म और अंत के बीच की रेखा नहीं,
बल्कि हर पल का एक नया प्रारंभ है,
जहाँ ठहराव भी कुछ सिखाता है,
और चलना ही सबसे बड़ा धर्म है।

हार यहाँ किसी अंत का नाम नहीं,
यह तो दिशा बदलने का संकेत है,
और जीत कोई स्थायी मुकाम नहीं,
बस आगे बढ़ने का एक अवसर है।

जो गिरकर खुद को कोसता नहीं,
बल्कि उठकर फिर चल देता है,
वही जीवन की कठोर भूमि पर,
अपने सपनों के बीज बो देता है।

जीवन का अर्थ भविष्य में नहीं,
न ही बीते कल की परछाई में है,
यह तो आज की उस साँस में छुपा है,
जो अभी, इसी क्षण आई है।

जो आज को पूरी सच्चाई से जी ले,
वह कल की चिंता से मुक्त हो जाता है,
हर पल को जो अर्थ दे पाता है,
वही जीवन का मूल्य समझ पाता है।

कभी मौन भी बहुत कुछ कहता है,
कभी प्रश्न उत्तर से बड़े होते हैं,
जो इन दोनों को स्वीकार कर ले,
वही भीतर से सच में खड़े होते हैं।

जीवन न तो केवल संघर्ष है,
और न ही केवल सुख का गीत,
यह आँसुओं और मुस्कानों के बीच,
चलती हुई एक सधी हुई रीत।

यह सिखाता है, झुकना भी जरूरी है,
हर बार अड़ जाना ठीक नहीं,
कभी-कभी खुद को बदल लेना,
सबसे बड़ी समझदारी होती है यहीं।

जो दूसरे के दर्द को अपना माने,
और अपने सुख को बाँटना जाने,
जीवन उसके लिए केवल अस्तित्व नहीं,
बल्कि मानवता की पहचान बन जाए।

अर्थ उसी जीवन में बसता है,
जो केवल अपने लिए न जिया जाए,
जहाँ कर्म में सच्चाई हो,
और मन में करुणा समा जाए।

अंत में जीवन कोई पहेली नहीं,
जिसे हल करना आवश्यक हो,
यह तो एक अवसर है—खुद को बेहतर बनाने का,
और दुनिया को थोड़ा और मानवीय बनाने का।

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