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कभी-कभी सोचता हूँ मैं,
क्यों होती है दिन, क्यों होती है रात,क्यों अब तक मेरी
किसी से नहीं हुई मुलाकात।
शायद वक्त ने अभी
कुछ पन्ने संभाल रखे हैं,
कुछ चेहरे, कुछ रिश्ते
दिल के लिए सम्भाल रखे हैं।
जब आएगा सही पल,
तो कहानी भी खास होगी,
आज भले तन्हा हूँ मैं,
कल मेरी भी कोई बात होगी।

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