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उस आने वाले कल के लिए
इस आज को खो रहा हूँ मैं

क्यों सांसें है थमी थमी
क्यों आँखों में है नमी नमी
क्या जीवन में है सचमुच कुछ कमी
सपनो जैसी सुनहरी कल के लिए
इस सच्चे से आज को खो रहा हूँ मैं

जब ये कल आयेगा
वो भी तो, आज कहलायेगा
और फिर
नये कल का खयाल फिर आयेगा
और फिर वो आज को दोहराएगा

बस ऐसे ही हर दिन
उस आने वाले कल के लिए
इस आज को खो रहा हूँ मैं

क्या ऐसे ही खत्म हो जायेगी ज़िंदगी
उस कल के इंतजार में
क्या आयेगा, वो कल - कभी कल
क्यों ना जीया जाए इस आज में
जब कल को भी, तब्दील होना हैं इस ही आज में

तो फिर
क्यों ना जीया जाए इस आज में
क्यों ना जीया जाए इस आज में

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