अगर में बोलूं कि इए सात बहनें और कोई इंसान नहीं बल्की सात स्थान है क्या आप इए जानते हैं कौन हैं इए सप्त भगिनि ओर कैसे हुआ इनका नाम ऐसा चलिए जानते हैं .....
इए बात है हमारे अति सुंदर देश की सुंदर रचना जहां बांस का घर हो जहां प्रकृति अपनी सर ऊंचा रहे हरे रंग से और जहां मेघ गण गति गा रही हो जहां त्योहार की गूंज सुनाई दे रही हो जी.. हां इए है सात बहनों की सच्चाई।
और सात है आमरे उत्तर पूर्ण के अरुणाचल प्रदेश, आसाम, मिजोरम, मणिपुर,नागालैंड,त्रिपुरा, मेघालय और इनका छोटा भाई कहलाने वाला सिक्किम।
हमारा भारत जैसे एक बड़ा परिवार है। और उस परिवार के उत्तर-पूर्व कोने में सात बेटियाँ रहती हैं, जिन्हें हम गर्व से "सात बहनें" बुलाते हैं। इन सात बहनों को देखकर समझ आता है कि हमारा देश कितना विशाल है, कितना रंगीन है, कितना सहनशील है।
अरुणाचल प्रदेश कहता है: मैं सबसे पहले उठकर देश के लिए सूरज का स्वागत करता हूँ। मेरे पहाड़ों से देश की सीमा की रखवाली होती है। यही है भारत । जिस देश के पहाड़ भी जागृत हैं, जिसके मठ भी शांति का संदेश देते हैं।
आसाम कहता है: मेरी ब्रह्मपुत्र नदी जैसे सबको जोड़ती है, भारत भी सब धर्म, सब जाति को जोड़कर रखता है। मेरी चाय पूरी दुनिया पीती है, और मेरे काजीरंगा का गैंडा कहता है कि इस देश में जानवर भी सुरक्षित हैं।
मणिपुर कहता है: मुझे देखकर दुनिया ने पोलो सीखा। भारत हमेशा दुनिया को कुछ नया देता आया है। मेरे लोकताक झील के तैरते द्वीप कहते हैं कि इस देश में असंभव भी संभव है।
मेघालय कहता है: मेरे पास बादल आकर सिर झुकाते हैं। भारत की मिट्टी में प्रकृति भी सिर झुकाती है। मेरे लोग जड़ों से पुल बनाते हैं। इस देश के लोग धैर्य से इतिहास गढ़ते हैं।
मिज़ोरम कहता है: मेरे पहाड़ों में शिक्षा की रोशनी जलती है। भारत के हर कोने में ज्ञान का दीप जल रहा है। बाँस के जंगल से भी बड़े सपने जन्म लेते हैं।
नागालैंड कहता है: मेरे यहाँ 16 जनजातियाँ भाईचारे से रहती हैं। यही है भारत। अलग भाषा, अलग पोशाक, लेकिन त्यौहार आए तो सब एक। Hornbill में पूरी दुनिया देखती है हमारी एकता का रंग।
त्रिपुरा कहता है: मेरे उनाकोटि के पत्थर कहते हैं कि ये देश हज़ारों साल पुराना है। फिर भी आज भी नया है। मेरे पास जनजाति और बंगाली एक साथ जीते हैं । यही है भारत की "विविधता में एकता"।
सात राज्य चीन, म्यांमार, बांग्लादेश की सीमा पर खड़े होकर भारत को संभालते हैंx। ये कहते हैं, देश का आखिरी गाँव भी पहला गाँव है
8% इलाके में 220 से ज़्यादा भाषा, 200 से ज़्यादा जनजाति । जिस देश के एक कोने में इतने रंग हों, वो देश कितना समृद्ध है सोचो।
मुख्य भारत से जोड़ने वाली सड़क सिर्फ 22 किमी। फिर भी ये सात बहनें कभी खुद को अलग महसूस नहीं करतीं । क्योंकि रास्ता पतला हो तो क्या, दिल बड़ा है। यही है भारत की आत्मा । और एक यही सीमा की पर करते हुए एक नया दुनिया आ जाता है।
कश्मीर से कन्याकुमारी, गुजरात से अरुणाचल, हमारे देश का हर कोना ऐसी ही कहानी कहता है। सात बहनें तो बस एक झलक हैं। भारत माने सिर्फ एक देश नहीं, एक एहसास है।
सात बहनें - भारत माँ के सात रंग
जब भारत माँ इंद्रधनुष पहनती हैं, तो उसके उत्तर-पूर्व का हिस्सा सात रंग बन जाता है, वही हैं हमारी सात बहनें।
यही है हमारा देश। छोटे से कोने में भी पूरी दुनिया को गर्व करने की वजह रखता है।
चलो, अब थोड़ा मज़ेदार अंदाज़ में फिनिश करते हैं। अरुणाचल बोले: "सूरज सबसे पहले मैं उठाता हूँ, तुम सब सोते रहो"
असम कहे: "चाय पियोगे? एक कप में पूरा देश जोड़ दूँ"
मणिपुर बोले: "झील पर नाचता हूँ, इंस्टा पर वायरल हूँ"
मेघालय हँसे: "बादल मेरे घर मेहमान बनके आते हैं, वापस जाते ही नहीं"
मिज़ोरम कहे: "किताब खोलो, मैं टॉपर हूँ"
नागालैंड चिल्लाए: "DJ बजाओ, मेरे 16 DJ हैं"
त्रिपुरा बोले: "इतिहास पूछो, पत्थर भी बोल पड़ेंगे"
सातों लड़ पड़ें तो भी चिकन नेक वाली चुन्नी इन्हें बांध के रखती है। पतली है पर मज़बूत है, टूटेगी नहीं।
तो भाई, ये सात बहनें हैं भारत का 7G नेटवर्क। सिग्नल फुल, स्पीड सुपरफास्ट, और पैकेज में 220 भाषाएं फ्री ।कनेक्शन कटेगा नहीं, गारंटी है । क्योंकि पासवर्ड एक ही है: "भारत माता"।