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नेहा और आयशा दोनों ही डेली कोचिंग के उसी रास्ते से जाती थीं, जो उनके लिए ईज़ी भी था और सीधा रास्ता भी। कोई गली नहीं, रोड से चलते हुए लेफ्ट हैंड पर जाते हुए राइट हैंड में उनकी कोचिंग थी। लेकिन आज दोनों उस सीधे रास्ते से नहीं, बल्कि कई तंग गलियों से गुज़रते हुए कोचिंग जा रही थीं। आखिर ऐसा क्यों?

नेहा और आयशा दोनों फ्रेंड थीं। उनके घर भी एक-दूसरे से काफी पास थे और दोनों 10वीं कक्षा में थीं। हाईस्कूल था, इसलिए दोनों पर स्टडी का बर्डन ज़्यादा था। मॉर्निंग 7 बजे कोचिंग जातीं और फिर कोचिंग से स्कूल। स्कूल से आतीं, तो स्कूल और कोचिंग का वर्क करते-करते उन्हें रात हो जाती। पेपर होने में केवल तीन महीने रह गए थे, इसलिए दोनों को स्टडी के सिवा और कुछ भी सोचने का टाइम नहीं मिलता था। लेकिन इसी मंथ उनके साथ कुछ ऐसा हुआ कि दोनों ही मेंटली डिस्टर्ब रहने लगीं। स्टडी पर फोकस करना उनके लिए मुश्किल हो गया।

नेहा जल्दी से रेडी होकर अपने घर से बाहर आई और आयशा को उसके घर से लेते हुए दोनों कोचिंग के रास्ते चल दीं। नेहा का घर आयशा के घर से पहले पड़ता था, इसलिए हमेशा नेहा को ही आयशा के घर जाना पड़ता था।

“नेहा, तुमने कल के नोट्स बनाए थे? मुझे दे देना,aa,” आयशा ने कहा।

“क्यों? जब सर बता रहे थे, तो तुमने क्यों नहीं बनाए?” नेहा गुस्से से देखते हुए बोली।

“मेरे तो सर के ऊपर से चल गया। उन्होंने क्या समझाया? मुझे तो कुछ भी समझ नहीं आया,” आयशा कहती है।

“इसी तरह तुम हर बार करती हो। आज मैं नहीं दूँगी। जब सर से डाँट पड़ेगी, तब सब समझ आने लगेगा।” नेहा चिढ़ते हुए बोली।

“नेहा, प्लीज़, अबकी बार दे दो। नेक्स्ट टाइम नहीं बोलूँगी।” आयशा रिक्वेस्ट करती है। नेहा उसका रोता हुआ चेहरा देखकर उसे देने के लिए तैयार हो जाती है। कुछ इसी तरह डेली दोनों में बातें होती थीं। कुछ दूर चलते हुए आयशा, नेहा से कहती है,

“नेहा, हमें कोई फॉलो कर रहा है… कल भी मैंने इसी लड़के को देखा था।”

“आयशा, ये रास्ता है। हर कोई इसी रास्ते से जाता है।” नेहा उकताते हुए बोली।

“नहीं, नेहा, वो लड़का हमें ही देख रहा है,” आयशा ने कहा।

“देखने दो। इन लड़कों का काम है लड़कियों को देखना। हमारी कोचिंग आ गई।” नेहा कहते हुए आयशा को लेकर कोचिंग के अंदर आ गई। ये बात नेहा को जितनी नॉर्मल लग रही थी, उतनी नहीं थी, नेक्स्ट डे,

दोनों आज फिर उसी रास्ते से कोचिंग जा रही थीं, जहाँ से वो पहले जाती थीं, आज फिर आयशा, नेहा से बोलती है,

“नेहा, वो देखो, वो लड़का आज भी हमें फॉलो कर रहा है।”

नेहा ने पलटकर देखा, तो आयशा की बात बिल्कुल सही थी। नेहा को भी शक होने लगा,

“क्या सच में ये हमें फॉलो कर रहा है? लेकिन क्यों?” नेहा धीरे से आयशा से कहती है।

“मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा, नेहा।” आयशा डरते हुए उसका हाथ पकड़ लेती है।

“तुम हमेशा डरपोक रहना… देखते हैं कितने दिन तक वो हमें फॉलो करता है।” नेहा कहती है।

“क्यों न हम रास्ता बदल दें?” आयशा ने कहा।

“हम्म, करके देखते हैं।” नेहा ने कहा और दोनों रोड से न होकर लेफ्ट हैंड की संकरी-सी गलियों से जाने लगीं। ये गली सीधे कोचिंग से थोड़ी दूर पर निकलती थी। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, वो लड़का वहाँ नहीं था,

“देखा, मैंने बोला था तुम्हें, हो सकता है वह उसी रास्ते से कहीं और जाता हो।” नेहा ने कहा,,,,लेकिन जैसे ही दोनों गलियाँ पार करके रोड पर पहुँचने वाली थीं, गली के उस पार वो लड़का वहाँ खड़ा था। आयशा और नेहा अब दोनों ही डर जाती हैं। दोनों फिर से उस गली को पार करते हुए उसी रोड पर आ जाती हैं, जहाँ से वो रोज़ जाती थीं। लेकिन जैसे ही वो रोड पर आती हैं, वो लड़का फिर से वहीं खड़ा उन्हें मिलता है। सुबह का टाइम होता है, इसलिए रोड पर कोई भी नहीं होता था। एक सन्नाटा-सा छाया होता था। ज़्यादातर कोचिंग के स्टूडेंट 12 बजे के बाद की कोचिंग कर रहे थे। नेहा और आयशा का स्कूल कोचिंग से थोड़ी दूरी पर था, इसलिए दोनों ने यही टाइम कोचिंग के लिए दिया था, ताकि वह कोचिंग और स्कूल एक साथ अटेंड कर सके। इससे उन्हें थोड़ा टाइम और मिल जाएगा स्टडी के लिए,

“अब क्या करें, नेहा?” आयशा डरते हुए नेहा से कहती है।

“हम इसी रास्ते से जाएँगे, जहाँ से डेली जाते हैं। अगर उस लड़के ने हमें परेशान करने की कोशिश की, तब हम कोचिंग के सर को बता देंगे।” नेहा ने कहा, और फिर धीरे-धीरे चलते हुए दोनों उसी रास्ते से कोचिंग जाने लगीं। वह लड़का भी उनके पीछे चल रहा था, लेकिन उसने कभी उन्हें कुछ नहीं कहा। नेहा और आयशा अभी भी घबरा रही थीं और डरते हुए किसी तरह वह कोचिंग पहुँच गईं, दोनों ने एक-दूसरे को देखा, जैसे दोनों कोई जंग लड़कर आई हों, घबराहट और डर से वह पसीने-पसीने हो रही थीं,

“तुम लोग अब आई हो? क्लास स्टार्ट हो गई है। कहाँ थी तुम दोनों?” सर की आवाज़ पर दोनों चौंक गईं और घबराते हुए तुरंत क्लास की तरफ चल दीं।

फिर तो ये डेली का रूटीन बन गया। वह लड़का उन्हें डेली फॉलो करता और जब भी वह दोनों अपना रास्ता बदलकर उन संकरी गलियों से जाने की कोशिश करतीं, वह वहाँ भी आ जाता, इस तरह कई दिन गुज़र जाते हैं। दोनों में इतनी हिम्मत नहीं हो रही थी कि वह अपने पेरेंट्स को बताएँ, क्योंकि फिर उनके पेरेंट्स कोचिंग जाने से मना करेंगे और उनकी स्टडी का एक रास्ता बंद हो जाएगा, दोनों ही इस बात से बहुत परेशान रहने लगी थीं। स्टडी पर भी उनका फोकस कम हो गया था, फिर एक दिन,

“आयशा, अब बहुत हो गया। अब हमें डरना नहीं है। अगर हम ऐसे ही डरते रहेंगे, वो हमें डराता रहेगा, अगर आज उस लड़के ने फिर से हमें फॉलो किया, तो हमें सर को बताना होगा।” नेहा कहती है।

“क्या सर हमारी बात सुनेंगे?” आयशा ने कहा।

“हाँ, क्यों नहीं सुनेंगे? और अगर वो नहीं सुनेंगे, तो पुलिस तो सुनेगी,” नेहा ने कहा।

“तुम पागल हो गई हो, मैं तो पुलिस को नहीं कह रही हूँ।” आयशा गुस्से से उसे देखते हुए बोली।

“अच्छा, अब गुस्सा मत हो। लेकिन अब और बर्दाश्त नहीं करूँगी मैं, आज उससे बात करके रहूँगी।” नेहा कहती है, कुछ दूर चलने पर वह लड़का उन्हें दिख गया, वह दोनों खामोशी से चल रही थीं। आयशा डरते हुए नेहा का हाथ पकड़े हुए थी। तभी वह देखती है कि वह लड़का उन दोनों की वीडियो बना रहा है,

“नेहा, वो तो हमारी वीडियो बना रहा है।” आयशा डरते हुए बोली, नेहा ने पलटकर देखा,,,आयशा की बात बिल्कुल सही थी, नेहा को गुस्सा आ गया,

“हे! तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई हमारी फोटो और वीडियो लेने की?” नेहा ज़ोर से चिल्लाई। वह दोनों कोचिंग के नज़दीक आ चुकी थीं। सन्नाटे में नेहा की तेज़ आवाज़ गूँजने लगती है,

“तुम्हें समझ नहीं आ रहा?” नेहा हिम्मत दिखाते हुए उस लड़के के हाथ से मोबाइल लेने की कोशिश की, लेकिन उस लड़के ने अपने मुँह पर हाथ रखते हुए नेहा को चुप रहने की वार्निंग दी। लेकिन आज नेहा चुप रहने वाली थी,

“हमारी फोटो और वीडियो डिलीट करो, वरना पुलिस में एफआईआर कर दूँगी तुम्हारी।” नेहा ने फिर से तेज़ आवाज़ में उस लड़के से बोला, शायद इस बार वह लड़का डर गया। वह तेज़ कदमों से चलता हुआ वहाँ से तुरंत चला गया। लेकिन नेहा की आवाज़ कोचिंग के अंदर भी पहुँच गई थी, अंदर जाते ही सर ने नेहा और आयशा दोनों से पूछा, दोनों ने उन्हें सारी बात बताई, सर ने नेहा की तारीफ़ की और दोनों को ये कहते हुए क्लास में भेज दिया कि वह उस लड़के को देख लेंगे, उस दिन के बाद से वह लड़का उन्हें फिर नहीं दिखाई दिया।

कभी-कभी हम छोटी-छोटी प्रॉबलम को इग्नोर करते हैं या फिर उनसे डरकर पीछे हट जाते हैं, और फिर यही प्रॉबलम एक बड़ा रूप ले लेती है। अगर उस दिन नेहा ने हिम्मत नहीं की होती, तो शायद ये उनके लिए एक बड़ी प्रॉबलम बन सकती थी और वह लड़का उनके साथ कुछ भी कर सकता था, हमें प्रॉबलम के बारे में नहीं, उसके सोल्यूशंस के बारे में सोचना चाहिए, यही सोच है नेहा की, मतलब कि मेरी, ये है मेरी कहानी, मेरी ज़िंदगी की एक छोटी-सी स्टोरी, जिसे मैं आज तक नहीं भूल पाई।

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