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सिया ने क्या किया?

क्यूँ किया?

जो किया वो ना था ज़रूरी|

पर जाने अनजाने,

एक दहशत सी फैल गई|

हर लड़की के अस्तित्व पर अब,

और शक की निगाहें टिक गई|

नाम सिया और रामराज्य की अग्नि परीक्षा दे रही वो इस दौर की,

या फिर खुद ही लक्ष्मण रेखा अनजाने में उसने पार की|

सबकी निगाओं में बस एक ही चेहरा हैं,

केतन या सिया का है|

समझ ना पायेगा कोई उस उलझन को,

जान लेना किसीकी इतना भी आसान नहीं|

शादी के बंधन से अब और लगने लग गया हैं डर,

प्रेम संबंध से ज्यादा घिनौना आज की दुनिया में कुछ और नहीं है बस|

चेतन था या था वो मारीच?

स्वर्ण हिरन जानकर उसने सारा ध्यान अपनी ओर खींच लिया?

कुछ लेना देना नहीं हैं फिर भी,

उन प्रश्नों के भंवर जाल में घिरा हैं हर कोई|

कोई किसी के करीब ना आये अब तो लगता यही हैं,

रिश्तों को संभालना सचमुच आसान नहीं हैं|

सोशल ट्रोलर्स ने इतना हैरान कर दिया हैं,

अब तो लगता यही हैं लोहागढ़ की पहाड़ी फट जाती|

तो सिया इस सोशल ट्राइल से तो बच जाती,

हर किसी को बस मज़ाक सूझ रहा है|

दफ़न का कफ़न चीर कर बस सबको पैसा कमाना हैं,

सच हो या झूठ, पर अधूरा सच सबको दिखाया जा रहा है|

सिया की ख़ामोशी भी किसी से सहन हो नहीं रही,

जैसे उसमें क्या कोई अच्छाई थी ही नहीं?

किया होगा गलत क्योंकि प्रेम होता हैं अँधा,

पर उस वेग में हत्या कर जाना?

केतन भी तो ना था उससे कोई अनजाना|

जिस उम्र के दोराहे पर उसको कॉलेज की पड़ाई करनी चाहिए थी,

आज खून के दोष में जल रही होगी उसकी आत्मा कहीं|

शादी के लिये भी तो तैयार किया ना उसके घर वालों ने,

तो क्यूँ  नहीं उसको ज़बरदस्ती 12th पास करवाकर और पढाई करवाई|

शायद जो हुआ वो हुआ ना होता,

शायद उसके वक़्त का कारवां उसको कहीं ओर ले गया होता|

हो भी सकता हैं ये श्रृंखला पिछले जन्मों के कर्मो की हो,

मिलना होगा इनको ऐसे अधूरे से रिश्तों में ही|

केतन का अच्छा होना ही ले गया भगवान के पास कुछ ज्यादा जल्दी ही,

हादसा होता तो चल भी जाता, हत्या का गुनहगार कौन और क्यों, यही तो चैन नहीं लेने दे रहा|

भूलना चाह रहे तो भी भूल नहीं पा रहे,

सोशल मीडिया पर बस इनके ही चेहरे दिख रहे हैं|

एआई (AI) जनरेटेड वीडियो से जैसे ये ही समक्ष खड़े हो गए,

और हमको इस हत्या के साक्षी बनाने के लिए उत्सुक हैं|

..कितने बच्चे होंगे जो ये देख रहे होंगे?

घटना होती क्या है समझ ना आए जिनको,

वो देखकर ना जाने क्या सीख रहे होंगे?

क्या पता सिया पर भी, सोनम राजा रघुवंशी का असर पड़ गया होगा?

वो मेघालय के पूर्वी खासी पर्वत थे,

तो ये भी लोहागढ़ की सह्याद्री पर्वत श्रृंखला|

लेकिन सोनम के लिए भी आसान कहाँ था,

अनुबंध हत्यारे का उसने भी तो सहारा लिया था|

तो सिया में ये हिम्मत कहाँ से आ गई?

लोहागढ़ के जो "दयालु", "सहनशील" या "धैर्य का पर्वत" हैं,

उन पर्वत ने भी उस हादसे को रोकना चाहा कई बार|

तो भी कुदरत का वो इशारा क्यों नहीं समझी सिया एक भी बार?

या सिया के रूप में ये सीता मैया की कोई सीख है?

कि बस अब प्रेम के जाल में और ना फसों,

और लालच का दामन अब तो छोड़ दो|

जिसकी जो करनी हैं वो तो उसको भरनी होगी ही,

पर जो हो रहा है घटित निरंतर चहुँ ओर, वही बिक रहा है|

दिल नहीं दहल रहा सब कुछ देख कर भी,

तभी चीख जा पहुँची पहाड़ी की वादियों में भी|

अभी भी धहेज प्रथा ख़त्म हुयी नहीं हैं,

औरतों पर अत्याचार की आज भी कोई सुनवाई नहीं होती है|

लेकिन पुरुष समाज अब चीख रहा हैं, डर गया हैं,

कुछ नारियों ने ऐसे कदम उठा लिए हैं|

सबको अचम्भा,

और चौकन्ना कर दिया है|

अब प्रेम रुपी मायाजाल में ना फंसना तुम ,

श्री राम तो आ जायेंगे , पर अब अहल्या ना बनना तुम|

ना होना किसी हाल में गुमसुम,

अब यही है जिंदगी का तरन्नुम|

क्या पता क्या हुआ होगा उस मंज़र पर?

अब तो लोहागढ़ के उस पॉइंट का नाम रख दिया सिया नाम पर|,

जिंदगी में कितना कुछ करना होता हैं,

पर अगले ही क्षण का पता ना होता हैं|

एक खौफ पनप रहा हैं,

एक दहशत जन्म ले रही है|

शादियों के नाम पर अब,

दहेज और निर्वाह व्यय से ही नाता रह गया हैं बस|

दुल्हे की हत्याएं अब हो रही हैं,

तो समाज लड़कियों की फांसी तक चाह रहा है|

जब दुल्हन रसोई घर में बेख़ौफ़ जला दी जाती थी,

तब समाज मौन क्यों हो जाता था?

समाज से ना डरों पर,

समझ से तो काम लो|

अगले पल का कुछ होश नहीं,

और एक ही पल में पूरी दुनिया पा लेना चाहते हो|

वक़्त गवाह हैं,

वो ना जी पाया जिंदगी ज्यादा, जिसने पा लिया जिंदगी में कुछ ज्यादा|

ये उम्र का तकाज़ा हैं,

सिया ,केतन,चेतन ने तो बस अपनी पात्रता निभाई है|

जिंदगी में कब क्या होगा यह कोई जानता नहीं हैं,

जिंदगी में कौन किसका काल बनके आएगा इससे सब अनजान हैं|

रिश्तों से प्यार का दामन अब ना उड़ने दो,

रिश्तों के ज़रिये अब एक दूसरे का दम ना घुटने दो|

आजकल का कायदा बस यही हैं,

हर पल जीते चलो, जब तक जी रहे हो खिलखिलाकर हँसते रहो|

दिल कभी टूट भी जाए,

तो अब चिंता मत करना|

दिल धड़क रहा हैं तब तक टुकड़ों को सहेज के रख लेना,

आत्महत्या की सोच, ना अपने ज़हन में एक भी क्षण रखना|

दिल के टुकड़े चाहे हज़ारों हो,

वो हज़ारों सपनों को पल्लवित कर देंगें|

हत्यारे तो बहुत मिल जाएंगे, दुनिया में सब के सब बेमिसाल हैं,

उन हत्यारों से भी हँसकर मिल लेना|

दो पल सुकून के उन को भी दे देना,

वो दो पल सुकून के ही उनको सच्चा इंसान बना देंगे|

यह तो कर्मो का युद्ध हैं,

इसको पार करके श्री कृष्ण के विराट स्वरूप में ही तो सम्मिलित होना हैं|

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