अभी 26 मार्च को एक डेस्टिनेशन मैरिज में बाली (इंडोनेशिया) गया था वहां मेरी ग्रांड डॉटर (10 yrs) भी कनाडा से आई थी हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। कनाडा वापस जाने के समय बहुत रोई । मैंने वहां से ऑस्ट्रेलिया जाते समय यह कविता लिखी और उसको अंग्रेजी अनुवाद के साथ भेजा। आशा है कि आपको पसंद आएगी।
बाबा की प्यारी बिटिया हो, आंसू नहीं बहाना तुम,
खुद रोकर अपने बाबा को, संग में नहीं रुलाना तुम!
रोने वालों को यह दुनियां, बस कमजोर समझती है,
बेटी यूँ रो रोकर खुद को, मत कमजोर दिखाना तुम!
रो कर इस दुनियां में बेटी, हासिल ना कुछ होता है,
अश्कों के दलदल में बेटी, खुद को नहीं धँसाना तुम!
यूँ हीं रोने, घबराने में, मत चैन सुकून अपना खोना,
हर गम को, धता बताकर, बस हंसना-मुसकाना तुम!
सुख दुख की फितरत है ऐसी, ये आयेंगे और जायेंगे,
ना सुख में इतराना, बिटिया, मत दुख में घबराना तुम!
सभी अपेक्षित नहीं मिला है, कभी किसी को दुनियां में,
जो भी हासिल पास तुम्हारे, सन्तोष उसी में पाना तुम!
असफलतायें मिलती है पर, अनुभव दे कर जाती है,
अर्जित ज्ञान-अनुभव से बेटी, लक्ष्य वही सब पाना तुम!
अश्कों में दुर्लभ अनुभव, ऊर्जा, नवसोच की दौलत है,
ऐसी ऊर्जा और शक्ति को, बिल्कुल नहीं बहाना तुम!
दुख के दल दल में कहीं कुछ, सुख के बीज छुपे होंगे,
सींच के अपने अश्रु नीर से, सुख उपवन महकाना तुम!
पथिक राह में फूल, कांटे, कहीं आग, कहीं वारिश भी,
संरक्षित आँखों के जल से, दुख की अग्नि बुझाना तुम!
आंसू में जो निहित ऊर्जा, उसे ‘लेज़र’ किरण बना लेना,
पथ के कांटे जला-जलाकर, कंटकमुक्त बनाना तुम!
ना रोने का किया है वादा, उसे दिल से तुम्हें निभाना है,
जो भी किए बाबा से वादे, ना किंचित कभी भूलना तुम!
सर्वश्रेष्ठ तुम ने बनना है, बस बाबा की यही चाहत है,
एक दिन बाबा की चाहत को, पूरा कर दिखलाना तुम!
एक दिन सबने ही जाना है, और बाबा भी तो जायेंगे,,
पर बाबा के जाने से अपना लक्ष्य भूलना जाना तुम!
याद मेरी पगकंट बने यदि, तो तत्क्षण बिसराना देना,
मुझे भूलना, पर मेरी बातें, हरगिज नहीं भूलना तुम!
हर विपत्ति में अवसर खोजो, नजर पारखी वो रखना,
बस संघर्षों की, इस दुनियां में, पारंगत हो जाना तुम!
होंगे पीढ़ी अन्तर मुद्दे पर मैं, दोष नहीं तुम को दूंगा,
तुम भी बाबा को सह लेना, इन पर नहीं उलझना तुम!
नहीं चाहता जग के दुख से, बच्चों की पहचान ना हो,
दुख कैसे सुख में बदलें, प्रभु कौशल वही सिखाना तुम!
बाबा की प्यारी बिटिया हो, आंसू नहीं बहाना तुम,
खुद रोकर अपने बाबा को, संग में नहीं रुलाना तुम!
अश्रु बहा कर, अपने बाबा की, सांसें नहीं घटाना तुम!!