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अभी दो दिन पूर्व -
नवभारत टाइम्स के हरदोई संस्करण में,
एक अनोखी सनसनीखेज खबर है आई,
हरदोई जिले के मल्लावां ब्लॉक के,
नेवादा पारस गांव निवासी सूरज तिवारी ने,
उत्तर प्रदेश के जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर,
एक ऑनलाइन कम्पलेंट,
इंद्रदेव के विरुद्ध दर्ज है कराई!
आरोप है कि इंद्रदेव ने,
बिना किसी पूर्व सूचना के,
मूसलाधार बारिश कराई है,
भारी तबाही मचाई है,
जिस से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है,
और आम जनता को,
अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने जिला मजिस्ट्रेट से गुहार लगाई कि -
“ मुझे इंद्रदेव का मोबाइल नंबर नहीं पता है,
और इंटरनेट पर ढूंढने पर भी नहीं मिला है,
अतः आप ही कुछ कीजिए,
आखिर आप जिले के ज़िम्मेदार अधिकारी हैं,
ये जिम्मेदारी आपकी है, नहीं हमारी है!
प्लीज, इस मामले को गंभीरता से लीजिये,
अपने 'दिव्य माध्यमों' का उपयोग करके,
इंद्रदेव को आवश्यक निर्देश दीजिये,
ताकि बारिश तुरंत नियंत्रित हो सके,
और जिले के लोगों को राहत मिल सके।
इस समस्या को गंभीरता से लीजिये,
खुद समझिये, इंद्रदेव को भी समझाइये,
“बारिश बंद कराने हेतु तुरन्त,
कृपया कोई जूनियर देवता/अधिकारी नियुक्त करवाइए!
उनसे कहिए - जब बरसना हो तो खूब बरसें,
पर पहले अनिवार्य रूप से बरसने की सूचना भिजवायें,
और हाँ अविलम्ब 24/7 उपलब्ध,
मोबाइल नंबर मंगवाइये,
वेबसाइट पर अपलोड करवाइए!
पूंछिए इंद्रदेव से - बिना बताए क्यों करते हैं वारिश,
सुनिश्चित कीजिए - नहीं है कोई स्वर्गलोक की साजिश,
पता कीजिए - संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations Organisation) या किसी स्पेस स्टेशन (Space Station) से कोई धमकी तो नहीं आई!

ये है उनकी अर्जी,
एकदम सच है, नहीं कुछ फर्जी!

आदरणीय इन्द्र देव,
वर्षा विभाग,
भारतीय भू खंड प्रभारी,
राम राम, साष्टांग प्रणाम!

महोदय! विनती सुनिए हमारी -
उत्तर प्रदेश में वर्षा है जारी,
कहीं कम, तो कहीं भारी,
हर ओर दिखता है बस पानी ही पानी,
योगी जी के प्रदेश में, ये कैसी मनमानी?
आप तो जल के देव कहलाते हो,
अपने कर्तव्य, मान-मर्यादा खुद ही भूल जाते हो,
बिना किसी सूचना के बरस-बरस कर.
हम बेवश प्राणियों पर जुल्म ढाते हो?
क्या वर्षा के आदेश पारित कर,
ब्रह्मा जी को मनाने में,
मक्खन लगाने में, हो गए हो ध्यानमग्न?
खुद देखिये-
गली, सड़क, खेत-खलिहान,
सब हो गए हैं जलमग्न,
बाहर निकलना मुश्किल है,
घर-घर जीवन अस्त-व्यस्त है,
बच्चे, आदमी, मवेशी मर रहे हैं,
किसान की फसलें रो रहीं हैं,
जनता है परेशान,
जल्दी से जल्दी कीजिए,
इस समस्या का समाधान!”

इतनी सी है मेरी अर्जी,
आगे आपकी मर्जी,
सदैव आपका आभारी,
सूरज तिवारी!

अर्जी पढ़ कर,
डीएम साहब भी, सोच में पड़े थे ,
क्या करें, क्या ना करें,
हाथ में फ़ोन लिए खड़े थे,
तभी आकाशवाणी गूंजी-
“ उत्तर प्रदेश वासिओं,
चीखो चिल्लाओ मत,
बताओ क्या परेशानी है, क्या मजबूरी है,
नहीं चाहिए, तो बंद करवा देता हूं पानी,
लेकिन मेरे पास मत आना,
जब बिन पानी याद आए नानी!"

सब मिमियाने लगे, बोले -
“हे स्वामी, ये क्या कह रहे हैं आप,
माय बाप,
बारिश आप की कृपा है,
पर सूचना देना ज़रूरी है!
प्रभो! आप तो अंतर्यामी हैं,
बस इतना कर दीजिए,
जब बरसना हो तो पहले,
मोबाइल पर मैसेज कर दीजिए!”

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