प्रभु से बस इतनी विनती है, बना रहे अपनों का साथ,
और भूले से भी कभी ना छूटे, हमसे वर्तमान का हाथ,
ये अरुणाई संग लायेगा, निश्चित अपने साथ !
थामो वर्तमान का हाथ !!

बीते कल की चोटों से ही, सच्चा सुख पथ जान लिया,
गिरकर उठने, बढ़ने का दम, मन ने खुद स्वीकार किया,
हर पीड़ा वरदान बनी और, ठोकर ठोकर सीख मिली,
अंधियारों में राह दिखाती, नव अनुभव की मुस्कान खिली !
कर्म साधना, वर्तमान का, चोली दामन सा संग साथ !!
थामो वर्तमान का हाथ !!!

श्रम की कलम, विश्वास की स्याही, स्वप्न सभी साकार करे,
आशाओं की रश्मि सुनहरी, घन घोर तमस संहार करे,
जब सत्कर्म राह के दीप बनेंगे, हर पथ आलोकित होगा,
दिव्य शक्तियों से अभिमन्त्रित, तेरा हर पल पल होगा !
तब परम पिता परमेश्वर का ही, होगा तेरे सर पर हाथ !!
थामो वर्तमान का हाथ !!!

भय की छाया दूर भगा दो, मन में साहस दीप जला लो,
क्षमा, प्रेम और मधुर भाव से, इस पावन जग को महका लो,
मन के बोझ, आडम्बर त्यागें, तो अंतरिक्ष तक जा सकते हैं,
छोटे छोटे सत्कर्मों से भी, स्वर्ग जमीं तक ला सकते हैं !
तब सूर्य के जैसा आभा मण्डित, निश्चित होगा सबका माथ !!
थामो वर्तमान का हाथ !!!

अतीत बने प्रेरणा हमारी, और भविष्य बने विश्वास,
वर्तमान की कर्मभूमि में, छिपा सफलता दिव्य प्रकाश,
हर क्षण क्षण जीवन बदले है, हर क्षण क्षण नई कहानी है,
आज संवारा जिसने जीवन, कल उसकी अमिट निशानी है !
भला डरें क्यूँ कभी किसी से, अब कर्म साधना है मम नाथ !!
थामो वर्तमान का हाथ !!!

समय की सरिता, बहती रहती, रुकना इस का काम नहीं,
जहाँ गुंजन यशगानों का हो, कोई उससे अच्छा धाम नहीं,
अन्तिम साँसों तक प्रयास हो, सत्कर्म रहें बस अपने साथ,
और गुंजन हो सांसों धड़कन में - "थामो वर्तमान का हाथ"!
जग छूटे, पर कभी ना टूटे, यह अपना, वर्तमान का साथ !!
थामो वर्तमान का हाथ !!!

" थामो वर्तमान का हाथ ", यही महा मंगलकारी है आदेश !,
"आज संवारो कल निखरेगा ", सत्य कथन है, शुभ सन्देश !!
यही आज का शुभ सन्देश !!!

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