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परमाणु अस्त्र, राफेल रहे, अनेकों घातक हथियार रहे,

जब अपने घर में आग लगी, तो व्यर्थ सभी हथियार रहे,
फ़्रांस की जलती सड़कों ने, दुनिया को प्रश्न थमाया है,
शस्त्रों से समृद्ध राष्ट्रों ने क्या, मानव को भी बचाया है?
जब अपने घर में आग लगी, तो व्यर्थ सभी हथियार रहे!

विज्ञान शिखर पर पहुँचा है, ब्रह्मांड को भी हम नाप रहे,
सागर की गहरी छाती में, विध्वंसक अस्त्रों को थाम रहे,
पर मन के भीतर की ज्वाला, क्या कोई शस्त्र बुझा सकता?
जब क्रोध विवेक पर चढ़ बैठे, क्या बम उसको समझा सकता?
राफेल की गर्जन क्या कर ले, जब घर में हों अंगार भरे!
जब अपने घर में आग लगी, तो व्यर्थ सभी हथियार रहे!!

जब सड़कों पर शोले भड़के, जब पत्थर ही संवाद बने,
जब भीड़ विवेक भुला बैठे और घर आंगन श्मशान बने,
महलों की उच्च दीवारों में, सत्ता के सब दावों का क्या?
सुख-शांति नहीं तो रक्षा घेरों के, होते कोई मायने क्या?
अब संसाधन सारे मौन खड़े और मानवता शर्मसार रहे!
जब अपने घर में आग लगी, तो व्यर्थ सभी हथियार रहे!!

विकसित, आधुनिक भवन ऊँचे, हर सुविधा, चौड़ी सड़कें,
नफरत के प्रदूषण में घुट कर, कैसे दो आहत दिल धड़कें,
केवल बल से ही मान नहीं, केवल धन से सुख नहीं मिले,
भय से सुख शांति नहीं मिली, न शस्त्रों से समाधान मिले ।
जिस विकास में प्रेम न हो, फिर कोई सुख से वहां रहे!
जब अपने घर में आग लगी, तो व्यर्थ सभी हथियार रहे!!

शक्ति चाहिए, पर शक्ति के संग, संयम का संचार रहे,
न्याय मिले जन-जन को, सबका सुरक्षित अधिकार रहे,
हम संवादों के सेतु बनें, और विश्वासों का विस्तार करें,
मतभेद रहें, पर वैर न हो, वो सम्मानपूर्ण व्यवहार करें!
अब मानवता की रक्षा में ही, हर शक्ति का उपयोग रहे!
जब अपने घर में आग लगी, तो व्यर्थ सभी हथियार रहे!!

परमाणु शक्ति बहुत बड़ी पर, प्रेम दिव्य महाशक्ति है।
शस्त्रों से सुरक्षित सीमायें, पर सद्भाव राष्ट्र की भक्ति है,
परमाणु विघटन की ऊर्जा, जन हित में उपयोग करो,
सत्ता मद छोडो, आँखें खोलो, मर्यादित व्यवहार करो!
विकास वही, जो शान्ति रचे, हर चेहरे पर मुस्कान रहे!
जब अपने घर में आग लगी, तो व्यर्थ सभी हथियार रहे!!

निज घर की आग बचाओ पर, मानवता का ध्यान रहे,
जीवन में अहंकार न हो, बस नैतिकता, स्वाभिमान रहे,
कट्टरता का क्षय होवे, जग में सह अस्तित्व का वास रहे,
अपनत्व, प्रेम, सद्भावों का, हर दिल में मधुर निवास रहे।

दुआ यही है—
इस उत्कृष्ट सृष्टि की रचना में, बस सर्वोपरि इंसान रहे,
सह अस्तित्व नहीं भूले मानव, न मानव से भयभीत रहे ,
"ईश्वर प्राप्ति का उत्कृष्ट साधन", बस इतना स्मरण रहे-
आपस के सहयोग से शोभित, सुख-शांति का मार्ग रहे!
अपनत्व, प्रेम के दिव्यपुंज से, ये आलोकित संसार रहे!!
अपनत्व, प्रेम की पावन गंगा, हर ह्रदय से अनवरत बहे!!!
अपनत्व, प्रेम की दिव्य महक से, सुरभित ये संसार रहे!!!!

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