जहाँ कार्य का सम्मान हो, और सपनों की हो उड़ान,
वहाँ हर महिला का होना चाहिए मान-सम्मान।
काम का आँगन ऐसा हो, जहाँ न हो कोई डर,
सुरक्षित होकर लौट सके, हर बेटी अपने घर।
POSH सिर्फ नियम नहीं, यह एक पावन वादा है,
सबको सुरक्षित रखने का, एक नेक इरादा है।
न कोई अनुचित बात हो, न गंदी कोई नज़र,
सभ्य बने कार्यस्थल, बदले अब यह मंज़र।
गर मर्यादा टूटे कहीं, तो चुप रहना अपराध है,
आवाज़ उठाना ज़ुल्म के खिलाफ, सच्ची देशभक्ति के साथ है।
कमेटी (IC) बैठी है वहाँ, सुनने तुम्हारी बात,
न्याय की मशाल जलाकर, थामेगी तुम्हारा हाथ।
बुरे स्पर्श और भद्दे तंज को, अब सहना बंद करो,
गरिमा के इस युद्ध में, तुम आगे कदम धरो।
पुरुष हो या महिला, मर्यादा सबकी शान है,
समानता और सुरक्षा ही, तरक्की की पहचान है।
आओ मिलकर हाथ बढ़ाएँ, ऐसा एक माहौल बनाएँ,
जहाँ निर्भय होकर सब, अपना कौशल दिखा पाएँ।