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कब तक हम एक दूसरे से आँखें चुराते रहेंगे?
ये चांद मेरे बस में कहां है?
और यूं ही तारे आपको देख कर शर्माते रहेंगे!

मोहब्बत क़बूल होनी तो खुदा के हाथ है..
हम तो अपनी किस्मत को हर बार आज़माते रहेंगे!

आज़ाद कर दो अब घर में सजावट के लिए रखे परिंदों को..
ये कब तक पिंजरे से आसमान निहारते रहेंगे?

आग तो लग जाती है दो लकड़ी के टुकडो से भी..
जनाब! आप कब तक हमारे खत जलते रहेंगे?

परख लिया है हमने भी मोहब्बत की क़ीमत को..
जब तक मिल ना जाए, हम भी दौलत कमाते रहेंगे!
जब तक मिल ना जाए, हम भी दौलत कमाते रहेंगे!

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