Image by Pexels

चाय का अद्भुत है पूर्व इतिहास,
चीन से शुरू 4000 वर्ष है खास,
भारत में अंग्रेज़ों का चाय इतिहास,
बहुत नया 200 साल है परिहास !!

चाय की गुणवत्ता में भारत है विख्यात,
चाय में दूध की मिलावट में भारत प्रख्यात,
वैसे! अंग्रेज़ों ने भारत में लाल चाय की शुरुआत,
बंगाली दादा ने बताई चाय में दूध की बात !!

इससे स्वाद-पेय से अंग्रेज़ों को आते मज़े की याद,
तब से प्रचलित हुई दुनिया में दूध की चाय स्वाद,
भारत के चाय-दूध की दुनिया को लगी मनभावन स्वाद,
अंग्रेज़ों ने असम में चाय खेती शुरू की है यह अपवाद !!

चाय बड़ा गुणकारी, पत्ते औषधीय चमत्कारी,
दूध मिश्रित हो तो चाय हो स्वास्थ्य 
लाभकारी,
व्यक्ति, परिवारों के हृदयभाव को जोड़ें हो उपकारी,
ईष्टमित्र, दोस्त, संबंधी, गैर होते सभी चाय पे आभारी !!

चाय के प्रचलित विश्व में अनेकों हुए प्रकार,
काला चाय, हरा चाय, सफेद चाय, औषधीय चाय, मसाला चाय, नींबू चाय,
हैदराबादी चाय, इरानी चाय, पंच धातु चाय, रूई बोस एप्पल चाय, उलोन्ग चाय,
सभी चाय भारत के जनमानस को है स्वीकार !!

चाय जीवाणु-रोधी पेय है, हृदयाघात नियंत्रक,
स्फूर्ति, ताज़गी देता चाय है, रक्तचाप नियंत्रक,
चाय बड़ा गुणकारी मानसिक आघात नियंत्रक,
चाय दवा है, है रोगनाशक जीवाणु नियंत्रक !!

चाय पत्तियों की प्रजाति के 1500 से अधिक हैं प्रकार,
दुनिया में महंगी चायपत्ती "दा होंग पाओ चाय" चीन करता तैयार,
भारत में नुक्कड़ में 5 रुपये से 450 रुपये में चाय का व्यापार,
भारत के विलासी "होटल ताज" में 1800 रुपये का चाय आकार !!

मेरे देश में घर-घर, गली-नुक्कड़ तक चाय बनती मज़ेदार,
जिन दुकानों में चाय बिकती वहाँ समझो खड़ी सरकार,
भारत की नहीं, जनता की स्वयं की समानांतर सरकार,
जिन्हें चाय से होता हो नुकसान
, उन्हें पीने की क्या दरकार ?

.    .    .

Discus