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मुझे अंधेरे से डर नहीं लगता,
मुझे तो झूटी चका चौंद से भय है,
मुझे काली रातें नहीं डराती,
मुझे तो उजाले के अंधकार का भय है,

ऐसा नहीं की सवालों से डर लगता है मुझे,
मुझे तो झूठे जवाबों का भय है,
मुझे मुश्किलों से डर नहीं लगता,
मुझे तो मज़बूरी का भय है,
मुझे हार् नहीं डराती
मुझे तो जीत में खो जाने का भय है,

मैं गिर जाऊ भले ही रोज़, मैं गुम जाऊ किसी भी और
क्योंकि मुझे उलझन से डर नहीं लगता,
मुझे तो ज़्यदा सीधे रास्तों का भय है,
मुझे तोड़ दे भले ये आँधी भी,
मोड़ ले मुझसे मुह दुनिया में सभी,
मुझे अकेलेपन से डर नहीं लगता,
मुझे तो भीड़ में गुल जाने का भय् है,

मुझे रोको टोको तोलो तुम जितना चाहे,
उड़ालो हसी मेरी हर बात की चाहे,
मुझे नमूना बनने से डर नहीं लगता,
मुझे तो मुझसा ना होने से भय है,

अरे लगाओ बोली हर बात की मेरी,
करो ठिठोली हर मात की मेरी,
मुझे चार लोग क्या कहेंगे से डर नहीं लगता,
मुझे तो मेरी चुप्पी से भय है,
मुझे अंधेरे से डर नहीं लगता,
मुझे तो झूटी चका चौंद से भय है

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